जम्मू-कश्मीर में बड़ा डिजिटल सुधार: वित्त विभाग ने एंड-टू-एंड ई-बिल सिस्टम को मंजूरी दी

जम्मू-कश्मीर में बड़ा डिजिटल सुधार: वित्त विभाग ने एंड-टू-एंड ई-बिल सिस्टम को मंजूरी दी


जम्मू, 27 जनवरी। जम्मू-कश्मीर में वित्तीय प्रक्रियाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। जम्मू-कश्मीर सरकार के वित्त विभाग ने सरकारी आदेश जारी कर एंड-टू-एंड ई-बिल सिस्टम के कार्यान्वयन को मंजूरी दी है।

यह आदेश नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की वर्किंग ग्रुप की सिफारिशों पर आधारित है और सभी पुराने मैनुअल बिल फॉर्मेट (एफसी-सीरीज) को रद्द करते हुए नए ई-बिल फॉर्मेट को अनिवार्य बनाता है। प्रधान सचिव वित्त (संतोष डी. वैद्य, आईएएस) द्वारा हस्ताक्षरित इस आदेश के अनुसार, जम्मू-कश्मीर ट्रेजरी कोड 2021 के नियम 5.11 के तहत संशोधित फॉर्मेट के साथ ई-बिल सिस्टम सभी ड्राइंग एंड डिस्बर्सिंग ऑफिसर्स (डीडीओ) और कोषागारों में लागू होगा।

मौजूदा एफसी-सीरीज मैनुअल बिल फॉर्मेट की जगह नए निर्धारित ई-बिल फॉर्मेट इस्तेमाल होंगे, जिन्हें उचित समय में जेकेपीएवाईएसवाईएस प्लेटफॉर्म में शामिल किया जाएगा। जेकेपीएवाईएसवाईएस जम्मू-कश्मीर का प्रमुख ऑनलाइन भुगतान और बिल प्रोसेसिंग सिस्टम है, जो पहले से ही कई प्रकार के बिल तैयार करने की सुविधा देता है।

आदेश में प्रभावी तिथि से बिल प्रोसेसिंग क्रम के बारे में बताया गया है। इनमें सर्वप्रथम सभी डीडीओ अनुलग्नक 'ए' में दिए गए निर्धारित ई-बिल फॉर्मेट का उपयोग कर जेकेपीएवाईएसवाईएस के माध्यम से बिल तैयार करेंगे। सभी सहायक दस्तावेज अपलोड करने होंगे। जम्मू-कश्मीर ट्रेजरी कोड के नियम 8.4 के अनुसार, कोषागार को भेजते समय डीडीओ द्वारा बिल पर अनिवार्य डिजिटल हस्ताक्षर (ई-साइन) किए जाएंगे।

ट्रेजरीनेट के जरिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्राप्त बिल पर कोषागार अधिकारी डिजिटल प्रोसेसिंग करेंगे और अपने डिजिटल हस्ताक्षर दर्ज करेंगे। कोषागार द्वारा डिजिटल मासिक खाते इलेक्ट्रॉनिक रूप से महालेखाकार, जम्मू-कश्मीर के कार्यालय को भेजे जाएंगे।

यह सिस्टम पारदर्शिता, गति और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने में मददगार साबित होगा। भौतिक बिल जमा करने की पुरानी प्रथा धीरे-धीरे समाप्त हो जाएगी। एनआईसी-जेके (नेशनल इंफॉर्मेटिक्स सेंटर, जम्मू-कश्मीर) डीडीओ और कोषागार अधिकारियों के लिए क्षमता-निर्माण कार्यक्रम आयोजित करेगा। ई-बिल सिस्टम का रोलआउट चरणबद्ध तरीके से होगा- 1 अप्रैल 2026 से पायलट कोषागारों में शुरू होकर बाद में पूरे केंद्र शासित प्रदेश में लागू होगा। इसके सफल होने के बाद भौतिक बिल पूरी तरह बंद हो जाएंगे।

यह सुधार डिजिटल इंडिया और ई-गवर्नेंस की दिशा में जम्मू-कश्मीर सरकार का महत्वपूर्ण प्रयास है। इससे सरकारी खर्चों की प्रक्रिया तेज, सुरक्षित और कुशल बनेगी। वित्त विभाग ने आदेश की प्रतियां विभिन्न उच्च अधिकारियों, विभागाध्यक्षों, जिला विकास आयुक्तों और अन्य संबंधित संस्थाओं को भेजी हैं, ताकि सभी स्तर पर इसका सख्ती से पालन सुनिश्चित हो।
 

Similar threads

Trending Content

Forum statistics

Threads
1,363
Messages
1,395
Members
17
Latest member
RohitJain
Back
Top