शेफाली वर्मा: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत के लिए खेलने वाली सबसे युवा क्रिकेटर, तोड़ा था अपने आदर्श का रिकॉर्ड

शेफाली वर्मा: अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में भारत के लिए खेलने वाली सबसे युवा क्रिकेटर, तोड़ा था अपने आदर्श का रिकॉर्ड


नई दिल्ली, 27 जनवरी। क्रिकेट को संभावनाओं और किस्मत का खेल कहा जाता है। क्रिकेट आपको हीरो बनने का मौका देती है। अवसर का लाभ उठाने वाले क्रिकेटर रोल मॉडल बन जाते हैं और फैंस की आंखों का तारा बन जाते हैं। ऐसी ही क्रिकेटर हैं शेफाली वर्मा, जिन्हें मौका मिला तो उन्होंने देश को विश्व कप दिला दिया। शेफाली वर्मा के नाम भारत के लिए खेलने वाले सबसे युवा क्रिकेटर (पुरुष और महिला) के रूप में दर्ज है, और ये उपलब्धि उन्होंने अपने आदर्श को पीछे छोड़ते हुए हासिल की थी।

शेफाली वर्मा का जन्म 28 जनवरी 2004 को रोहतक, हरियाणा में हुआ था। शेफाली का जन्म ऐसे परिवार में हुआ था, जहां क्रिकेट का माहौल था। उनके पिता संजीव वर्मा का सपना भारत के लिए खेलने का था, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों की वजह से उन्हें अपने लक्ष्य से पीछे हटना पड़ा। हालांकि, अपने तीन बच्चों को उन्होंने कभी खेलने से नहीं रोका। शेफाली के एक छोटी बहन है और एक बड़ा भाई है। तीनों ही क्रिकेट खेलते हैं और साथ खेलते हुए बड़े हुए।

शेफाली का क्रिकेट के प्रति लगाव अद्भुत था। नेट्स में घंटों अभ्यास करना। अपनी फिटनेस और क्रिकेट पर काम करने का उनका जज्बा सबसे अलग था। शेफाली ने बचपन से ही सचिन तेंदुलकर को अपना आदर्श माना है। सचिन की वीडियो देखकर उन्होंने अपनी बल्लेबाजी को धारदार और दमदार बनाया है। दाएं हाथ की आक्रामक सलामी बल्लेबाज शेफाली का बचपन से सपना देश के लिए खेलना और बड़ा नाम करना था। इस जुनून ने ने उन्हें भारत के लिए खेलने वाले सबसे युवा क्रिकेटर (पुरुष या महिला) बनने का मौका दिया। महज 15 साल 239 दिन की उम्र में शेफाली ने टी20 में भारत के लिए डेब्यू किया था। शेफाली ने सबसे युवा क्रिकेटर के रूप में भारत के लिए खेलने के अपने आदर्श सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड को तोड़ा था। सचिन ने 16 साल 238 दिन की उम्र में भारत के लिए डेब्यू किया था।

शेफाली तीनों फॉर्मेट में भारत की तरफ से डेब्यू करने वाली (पुरुष या महिला) सबसे युवा क्रिकेटर हैं।

डेब्यू के बाद से शेफाली लगातार भारतीय टीम का हिसाा रही हैं। महिला वनडे विश्व कप 2025 से ठीक पहले वह खराब फॉर्म से गुजर रही थीं और इस वजह से उन्हें विश्व कप की टीम में नहीं चुना गया था। बतौर ओपनर स्मृति मंधाना के साथ प्रतिका रावल खेल रही थीं। प्रतिका रावल का प्रदर्शन भी अच्छा था, लेकिन सेमीफाइनल से ठीक पहले रावल इंजर्ड होकर विश्व कप से बाहर हो गईं। उनकी जगह शेफाली वर्मा को मौका दिया गया। सेमीफाइनल में शेफाली का बल्ला नहीं चला, लेकिन 2 नवंबर 2025 को दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ हुए फाइनल मुकाबले में बल्ले और गेंद से दमदार प्रदर्शन कर न सिर्फ उन्होंने भारतीय टीम को पहली बार विश्व चैंपियन बनाया, बल्कि अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करा लिया। शेफाली का विश्व कप फाइनल में किया गया प्रदर्शन हमेशा याद किया जाएगा।

फाइनल में शेफाली ने 78 गेंद पर 87 रन बनाने के अलावा 7 ओवर में 36 रन देकर 2 विकेट लिए थे और प्लेयर ऑफ द मैच रही थीं। किस्मत ने शेफाली को मौका दिया जिसका फायदा उन्होंने उठाया और भारत को चैंपियन बनाने के साथ ही एक बड़े रोल मॉडल के रूप में उभरीं हैं।

अब तक के करियर पर नजर डालें तो शेफाली ने 5 टेस्ट में 1 शतक और 3 अर्धशतक की मदद से 567 रन बनाए हैं। उनका सर्वाधिक स्कोर 205 है। वहीं 31 वनडे में 5 अर्धशतक की मदद से 741 और 95 टी20 में 14 अर्धशतक की मदद से 2,462 रन बनाए हैं।

शेफाली अभी सिर्फ 22 साल की हैं। उनका करियर बहुत लंबा है, और आने वाले समय में महिला क्रिकेट में बल्लेबाजी के तमाम रिकॉर्ड अपने नाम कर सकती हैं।
 
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