दूसरे धर्मों से आए फूलों पर रोक जरूरी, मंदिर की पवित्रता से समझौता नहीं: काशी विश्वनाथ के मुख्य पुजारी

दूसरे धर्मों से आए फूलों पर रोक जरूरी, मंदिर की पवित्रता से समझौता नहीं: काशी विश्वनाथ के मुख्य पुजारी


वाराणसी, 27 जनवरी। श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी रामानंद दुबे ने बताया कि काशी एकमात्र जगह है जहां से विश्व का दर्शन होता है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया में काशी ही एकमात्र ऐसी जगह है, जहां आप पूरी दुनिया को देख सकते हैं। दुनिया भर से लोग यहां आते हैं।

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के मुख्य पुजारी रामानंद दुबे ने आईएएनएस से बातचीत में काशी की महिमा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि काशी का अस्तित्व सिर्फ गंगा और विश्वनाथजी से है। लोग यहां गंगा मां के दर्शन करने और श्री काशी विश्वनाथ का आशीर्वाद लेने आते हैं।

उन्होंने बताया कि जो लोग यहां घूमने-फिरने के लिए आते हैं, लेकिन यहां के होकर रह जाते हैं। यह पूर्व जन्मों का पुण्य होता है। सभी को पूर्ण तरीके से आनंद प्राप्त होता है। विश्वनाथ किसी के साथ भेदभाव नहीं करते हैं। जो संस्कार से पूर्ण है, वही यहां मंदिर दर्शन के लिए लायक है। जिनको संस्कार से मतलब नहीं है, वे यहां आने लायक नहीं हैं।

मंदिर में दूसरे धर्मों द्वारा भेजे जा रहे फूलों के प्रवेश को लेकर रामानंद दुबे ने कहा कि सख्त नियम होने चाहिए। उन्होंने कहा कि हां, इसे निश्चित रूप से रोका जाना चाहिए। हमें उन फूलों की पवित्रता के बारे में भी सोचना चाहिए, जो हम अपने देवता को चढ़ाते हैं। भगवान के नाम पर हमें किससे किस तरह का ज्ञान मिल रहा है? जो व्यक्ति माला बेच रहा है, वह किस जाति का है? उसने किस सोच के साथ वह फूल वहां रखा है? उस फूल के साथ कैसा व्यवहार कर रहा है? पेड़ पर फूल जब होता है, तो भगवान से प्रार्थना करता है कि वो किसी देवता के चरणों में पहुंचे।

उन्होंने कहा कि पूर्वकाल में भी मुसलमानों का मंदिर में प्रवेश नहीं था। वास्तविक सनातन धर्म का पालन करने वाले लोग किसी दूसरे धर्म के स्थान पर प्रवेश नहीं करते हैं।

रामानंद दुबे ने बताया कि हमारे यहां भारतवर्ष में, सनातन वैदिक धर्म में, ऋषियों ने सबूत दिया है कि गर्भाधान आदि 16 प्रकार के संस्कार हैं। जन्म से लेकर जवानी और बुढ़ापे तक, सनातन वैदिक धर्म में हमारे जीवन में जो संस्कार किए जाते हैं। जो लोग उन संस्कारों से युक्त नहीं हैं, उन्हें मंदिर में प्रवेश का अधिकार नहीं है।
 
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