‘पंडित’ टिप्पणी पर बवाल, अलंकार अग्निहोत्री ने प्रशासनिक रवैये को बताया अपमानजनक

‘पंडित’ टिप्पणी पर बवाल, अलंकार अग्निहोत्री ने प्रशासनिक रवैये को बताया अपमानजनक


बरेली, 27 जनवरी। उत्तर प्रदेश के बरेली जिले में एक बड़ा प्रशासनिक विवाद सामने आया है। सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के इस्तीफे के ठीक बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया है। इसके बाद 2019 बैच के पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री ने मंगलवार को पत्रकारों से बात करते हुए जिलाधिकारी पर गंभीर आरोप लगाए।

दरअसल, अलंकार अग्निहोत्री ने सरकारी नीतियों, खासकर यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) के नए नियमों के खिलाफ गहरी नाराजगी जताई थी। उनका आरोप है कि ये नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव करते हैं और कैंपस में जातिगत असंतोष पैदा कर सकते हैं। इसके अलावा, उन्होंने शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े एक विवाद का भी जिक्र करते हुए दावा किया कि प्रशासन ने सनातन संस्कृति के प्रतीकों और संतों का अपमान किया।

अलंकार अग्निहोत्री ने पत्रकारों से बात करते हुए कहा, "उत्तर प्रदेश सरकार के सिस्टम से मेरा भरोसा पूरी तरह खत्म हो गया है। जिलाधिकारी को एक कॉल आया, जिसमें किसी ने उन्हें ऑर्डर देते हुए कहा, 'पंडित पागल हो गया है।' पंडित सनातन संस्कृति का प्रतीक है। पूरे राज्य में ब्राह्मण, कायस्थ, ठाकुर समेत कई समुदायों के लोगों को पंडित कहा जाता है। यह किसी एक जाति पर आधारित नहीं है।"

उन्होंने इसे अपमानजनक और असहनीय बताया और कहा कि यह सिर्फ उनके बारे में नहीं, बल्कि पूरे समाज और सनातन संस्कृति के साथ अन्याय है।

उन्होंने आरोप लगाया कि डीएम के कैंप ऑफिस में उन्हें रातभर बंधक बनाकर रखने की कोशिश की गई। डीएम ने उन्हें व्यक्तिगत कारणों से नहीं बुलाया, लेकिन छोटे सवालों को समझाने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। उन्होंने डीएम से मौजूद रहने और सवालों के जवाब देने की मांग की।

अग्निहोत्री ने बताया कि शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने फोन पर बात कर आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि माघ मेले और सार्वजनिक कार्यक्रमों में सनातन संस्कृति के प्रतीकों पर हमला हुआ, जिसमें स्थानीय प्रशासन शामिल था। अलंकार ने इसे सिद्धांतों के आधार पर मजबूती से उठाया और साहस दिखाया।

एडीएम सिटी सौरभ दुबे ने पूरे मामले को लेकर कहा, "सोमवार को हम बरेली में सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री के घर गए थे। सभी संबंधित अधिकारी वहां मौजूद थे। हमने उनकी चिंताओं को समझने की कोशिश की और उनसे शांति से बात की। हमने उनसे कहा कि अगर उन्हें किसी तरह की दिक्कत हो रही है, तो वे कुछ दिन आराम कर सकते हैं और अगर कोई और समस्या है तो हमें बताएं। हालांकि, सिटी मजिस्ट्रेट ने बार-बार हमारी बातों को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि हम उन्हें समझ नहीं पाएंगे।"
 

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