अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर उमा भारती बोलीं- शंकराचार्य होने का सबूत मांगकर प्रशासन ने किया मर्यादाओं का उल्लंघन

अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर उमा भारती बोलीं- शंकराचार्य होने का सबूत मांगकर प्रशासन ने किया मर्यादाओं का उल्लंघन


नई दिल्ली/भोपाल, 27 जनवरी। मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता उमा भारती ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद को लेकर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य होने का सबूत मांगकर प्रशासन ने अपनी मर्यादाओं और अधिकारों का उल्लंघन किया है।

पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, "मुझे विश्वास है कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी महाराज और उत्तर प्रदेश सरकार के बीच कोई सकारात्मक समाधान निकल आएगा। लेकिन प्रशासनिक अधिकारियों की ओर से शंकराचार्य होने का सबूत मांगना प्रशासन की अपनी मर्यादाओं और अधिकारों का उल्लंघन है। यह अधिकार सिर्फ शंकराचार्यों और विद्वत परिषद का है।"

इसी बीच, कांग्रेस के सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने भी निशाना साधा है। उन्होंने मंगलवार को 'एक्स' पोस्ट में लिखा, "धर्म के नाम पर राजनैतिक रोटी सेकने वाले अब सत्ता के अहंकार में सनातन धर्म का अपमान करने का अधर्म कर रहे हैं। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद जी से शंकराचार्य होने का सबूत मांगना अस्वीकार्य है। पुरोहितों को शिखा पकड़कर घसीटना और संतों के पवित्र स्नान में विघ्न डालना बहुत शर्मनाक है। सत्ता का अहंकार छोड़कर भाजपा को शंकराचार्य जी से तुरंत माफी मांगकर उन्हें ससम्मान स्नान करवाना चाहिए।"

पिछले 10 दिन से प्रयागराज में अविमुक्तेश्वरानंद का धरना जारी है। उन्होंने मंगलवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से कहा कि यह विरोध लगातार जारी रहेगा। माघ मेला पूरा होने पर हम वापस जाएंगे और अगली बार फिर से प्रयागराज में धरने पर बैठेंगे। उन्होंने कहा कि हमारा शिविर प्रवेश तभी होगा, जब हमारा ससम्मान संगम स्नान होगा।

बता दें कि 17 जनवरी को मौनी अमावस्या के अवसर पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती प्रयागराज मेघा मेला में संगम घाट पर स्नान करने पहुंचे थे। पूरे लाव-लश्कर के साथ वह अपनी पालकी पर आए थे, लेकिन पुलिस प्रशासन ने उन्हें बिना रथ के आगे बढ़ने को कहा। इसी बात पर अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और मेला व्यवस्था में जुटे कर्मचारियों के बीच विवाद हुआ था। बाद में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि उनके साथ यह व्यवहार जानबूझकर किया गया है। विवाद उस समय और बढ़ा, जब अविमुक्तेश्वरानंद माघ मेले में ही धरने पर बैठ गए।
 

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