कार्ति चिदंबरम के बयान पर शहजाद पूनावाला बोले, ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ संविधान की मूल भावना

कार्ति चिदंबरम के बयान पर शहजाद पूनावाला बोले, ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ संविधान की मूल भावना


नई दिल्ली, 26 जनवरी। भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पद्म पुरस्कारों और 'वन नेशन, वन इलेक्शन' को लेकर कांग्रेस सांसद कार्ति चिदंबरम के बयान पर प्रतिक्रिया दी। सोमवार को उन्होंने कहा कि कार्ति चिदंबरम को संविधान के इतिहास और देश की लोकतांत्रिक परंपराओं को ठीक से समझना चाहिए, इससे पहले कि वे इस विषय पर टिप्पणी करें।

शहजाद पूनावाला ने आईएएनएस से कहा कि 'वन नेशन, वन इलेक्शन' की व्यवस्था देश में पंडित जवाहरलाल नेहरू और इंदिरा गांधी के दौर तक लागू थी और यह संविधान की मूल भावना का हिस्सा रही है।

उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता की लालसा में इंदिरा गांधी के समय इस व्यवस्था को तोड़ा गया। इस विषय पर मजाक उड़ाने से पहले कांग्रेस नेताओं को यह देखना चाहिए कि संविधान में पहले क्या व्यवस्था थी।

पद्म पुरस्कारों को लेकर शहजाद पूनावाला ने कहा कि आज इन्हें 'पीपुल्स पद्म' कहा जा सकता है, क्योंकि मौजूदा सरकार जमीनी स्तर पर काम करने वाले आम लोगों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विभिन्न क्षेत्रों में योगदान देने वालों को सम्मानित कर रही है। उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने राजनीतिक विरोधी दलों से जुड़े लोगों को भी निष्पक्ष रूप से पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया है।

उन्होंने कांग्रेस के पुराने दौर पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पहले पुरस्कार किसे और क्यों मिलते थे, यह देश जानता है। पूनावाला ने आरोप लगाया कि एक समय अपने परिवार के सदस्यों को भारत रत्न जैसे सर्वोच्च सम्मान दिए गए, जबकि डॉ. भीमराव आंबेडकर और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे महान नेताओं को लंबे समय तक इस सम्मान से वंचित रखा गया।

पद्म पुरस्कारों की मौजूदा सूची का जिक्र करते हुए शहजाद पूनावाला ने कहा कि इससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी के नेतृत्व के बीच का अंतर साफ दिखाई देता है। मोदी सरकार पुरस्कार देते समय यह नहीं देखती कि व्यक्ति किस पार्टी से जुड़ा है, बल्कि यह देखा जाता है कि उसका देश के लिए क्या योगदान रहा है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि पिछले वर्षों में अलग-अलग विचारधाराओं और दलों से जुड़े नेताओं और समाजसेवियों को सम्मानित किया गया है। इसमें पूर्व प्रधानमंत्रियों, समाजवादी नेताओं और विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ राजनेताओं के नाम शामिल हैं।

राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए शहजाद पूनावाला ने कहा कि वे एक गंभीर और परिपक्व नेता नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व पर अब विपक्षी दलों के भीतर भी सवाल उठने लगे हैं। समाजवादी पार्टी और तृणमूल कांग्रेस के कुछ नेताओं के बयानों का हवाला देते हुए कहा कि राहुल गांधी को हटाने और गठबंधन को बचाने की बातें खुद विपक्षी खेमे से सामने आ रही हैं।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि जब राहुल गांधी चुनाव हारते हैं, तो कभी चुनाव आयोग, कभी ईवीएम और कभी अन्य संस्थाओं पर सवाल खड़े किए जाते हैं। विपक्ष के कई नेता भी राहुल गांधी के इन बयानों से दूरी बना लेते हैं। लगातार चुनाव हारने के बावजूद राहुल गांधी को नेतृत्व सौंपे जाने पर देश में सवाल उठ रहे हैं।

कांग्रेस के अंदरूनी हालात पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि पार्टी के वरिष्ठ नेता शकील अहमद सहित कई लोग कांग्रेस की रणनीति और नेतृत्व पर सवाल उठा चुके हैं। राहुल गांधी मजबूत और वरिष्ठ नेताओं को अपने साथ नहीं रख पाते और पार्टी के भीतर असहमति को जगह नहीं देते।

शहजाद पूनावाला ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस अब एक 'परिवार-आधारित संगठन' बनकर रह गई है, जहां योग्यता से ज्यादा पारिवारिक पहचान को महत्व दिया जाता है। देशहित या पार्टी हित में बोलने वाले नेताओं को किनारे कर दिया जाता है, चाहे वह शशि थरूर जैसे वरिष्ठ नेता ही क्यों न हों।

तेजस्वी यादव को राजद का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने पर उन्होंने कहा कि चुनाव हारने के बाद भी कुछ नेताओं को बड़े पदों से नवाजा जाता है, जिससे जनता में गलत संदेश जाता है। राजनीति में जवाबदेही और पारदर्शिता जरूरी है।
 

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