पटना, 26 जनवरी। बिहार में पिंक बसों का संचालन पूरी तरह महिलाएं करने जा रही हैं। अब महिला ड्राइवर भी तैयार हैं। गणतंत्र दिवस पर वे झांकी का भी हिस्सा बनीं। पहले चरण में 6 महिला ड्राइवरों को ट्रेनिंग दी गई है। यह सभी समाज में सबसे पिछड़े महादलित समुदाय से आती हैं।
पटना के परिवहन कार्यालय से इसकी शुरुआत की गई है। परिवहन विभाग ने पिछले साल मई में पिंक बस सेवा की शुरुआत की थी। तब यह सोचा गया था कि इसमें ड्राइवर और कंडक्टर सभी महिलाएं ही होंगी।
बिहार परिवहन के मुख्य निदेशक अतुल कुमार वर्मा ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, "पिंक बसें महिलाओं के लिए हैं, महिलाओं द्वारा चलाई जा रही हैं। इसका मुख्य मकसद महिलाओं की सुरक्षा पक्का करना है। यह राज्य सरकार की एक अनोखी पहल है। इस बार एक नया पहलू यह है कि महिलाओं को एचएमवी लाइसेंस दिए गए हैं और स्टीयरिंग व्हील उनके हाथों में है। इससे महिलाओं की पूरी भागीदारी पक्की होती है।"
उन्होंने कहा कि बिहार में महिलाओं के सपने पूरे करने में सरकार उनके साथ खड़ी है। महिलाएं बस में सुरक्षित महसूस करें इसके लिए भी इसकी शुरुआत की गई। आप लोगों को पता होगा परिवहन निगम को झांकी में पहला पुरस्कार मिला है, यह हमारे लिए बहुत ही गर्व का विषय है।
पिंक बस की ड्राइवर अनीता कुमारी ने कहा, ''मैं बहुत खुश हूं। आज हमारे लिए बहुत अच्छा दिन है। हमने कभी नहीं सोचा था कि हम पिंक बस चलाएंगी। आज हमें यह मौका मिला है। हम बहुत खुश हैं कि हम यहां पहुंची हैं। हम अपनी तरफ से मुख्यमंत्री को धन्यवाद देते हैं।''
पिंक बस की ड्राइवर आरती कुमारी कहती हैं, "मैं भोजपुर जिले की रहने वाली हूं। मैं 2023 से नारी गुंजा से जुड़ी हुई हूं। मैंने औरंगाबाद में एलएमवी के लिए 21 दिन की ट्रेनिंग ली है और एचएमवी के लिए एक महीने की। मैं मुख्यमंत्री को धन्यवाद देना चाहूंगी।"
पिंक बस की ड्राइवर सरस्वती कुमारी ने कहा, ''मैं बहुत खुश हूं कि हम वो कर पा रहे हैं, जो पुरुष करते हैं। हम सरकार के रिजर्वेशन का फायदा उठा रहे हैं। हम चाहते हैं कि रिजर्वेशन जारी रहे ताकि लड़कियां मोटिवेट हो सकें और दूसरी लड़कियां अपने सपने पूरे कर सकें।''