नई दिल्ली, 26 जनवरी। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली में 16 से 18 जनवरी के बीच “क्रिटिकल फिलॉसफी ऑफ कास्ट एंड रेस” विषय पर एक सम्मेलन आयोजित किया गया था। अब इस सम्मेलन को लेकर गंभीर आपत्तियां सामने आई हैं।
सम्मेलन में आमंत्रित वक्ताओं के चयन और प्रस्तुत किए गए विषयवस्तु को लेकर संस्थान के भीतर व बाहर गहन चिंताएं व्यक्त की गई हैं। इसको देखते हुए आईआईटी दिल्ली ने पूरे मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की है। गौरतलब है कि कुछ लोग इस आयोजन व यहां रखे गए तथ्यों को वामपंथी प्रचार बता रहे हैं और मानविकी विभाग को बंद करने तक की मांग कर रहे हैं।
वहीं, दूसरा पक्ष इसे सामाजिक असमानता पर वैज्ञानिक या दार्शनिक चर्चा बता रहा है। सोमवार को इस संबंध में जानकारी देते हुए समिति गठित करने के बारे में बताया गया। आईआईटी दिल्ली का कहना है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने सम्मेलन से जुड़े संबंधित फैकल्टी मेंबर्स से औपचारिक रूप से स्पष्टीकरण मांगा है।
इसके साथ ही, आईआईटी दिल्ली ने कहा है कि उठाई गई विभिन्न आपत्तियों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच सुनिश्चित की जाएगी। इस जांच के उद्देश्य से आईआईटी दिल्ली ने सोमवार को स्वतंत्र सदस्यों वाली एक फैक्ट फाइंडिंग कमेटी का गठन किया है। संस्थान की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, यह समिति सम्मेलन के आयोजन, वक्ताओं के चयन, प्रस्तुत विचारों तथा संस्थागत नियमों और दिशानिर्देशों के अनुपालन की विस्तार से समीक्षा करेगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर संस्थान की स्थापित प्रक्रियाओं और प्रोटोकॉल के अनुरूप उचित कार्रवाई की जाएगी।
आईआईटी दिल्ली ने स्पष्ट किया है कि उनका यह संस्थान राष्ट्रीय लक्ष्यों, शैक्षणिक ईमानदारी और स्थापित संस्थागत मानकों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। संस्थान का कहना है कि शैक्षणिक स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए यह भी सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है कि किसी भी शैक्षणिक गतिविधि में संस्थान की गरिमा, मूल्यों और दिशानिर्देशों का उल्लंघन न हो। प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि जांच प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और तथ्य-आधारित होगी तथा समिति की सिफारिशों के अनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
दरअसल आईआईटी दिल्ली का यह बयान उनके मानविकी विभाग के तीसरे वार्षिक ‘क्रिटिकल फिलॉसफी ऑफ कास्ट एंड रेस’ सम्मेलन के खिलाफ सोशल मीडिया पर व्यापक विरोध के जवाब में आया है। अब सम्मेलन के वक्ताओं के चयन और सामग्री को लेकर चिंताएं प्रकट की गई हैं। संस्थान ने संबंधित फैकल्टी सदस्य से स्पष्टीकरण मांगा है। वहीं स्वतंत्र सदस्यों वाली एक फैक्ट-फाइंडिंग कमिटी भी गठित की गई है, जो इन चिंताओं की जांच करेगी। संस्थान का कहना है कि वह राष्ट्रीय लक्ष्यों, शैक्षणिक निष्ठा और स्थापित दिशानिर्देशों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराता है।