मायावती ने भारतीयों को 77वें गणतंत्र दिवस पर दी बधाई, एसआईआर, धर्म परिवर्तन, महंगाई का भी किया जिक्र

मायावती ने भारतीयों को 77वें गणतंत्र दिवस पर दी बधाई, एसआईआर, धर्म परिवर्तन, महंगाई का भी किया जिक्र


लखनऊ, 26 जनवरी। बसपा सुप्रीमो मायावती ने देश और दुनिया में रहने वाले भारतीयों को 77वें गणतंत्र दिवस की बधाई दी है। इसके साथ ही उन्होंने लोगों से यह आंकलन करने के लिए कहा है कि क्या केंद्र व राज्य सरकारों की बातें केवल छलावा हैं या लोगों के जीवन स्तर में सुधार भी आया है।

बसपा की तरफ से जारी किए गए प्रेस नोट के अनुसार, इस मौके पर मायावती ने कहा है कि आज के दिन का विशेष महत्व यही है कि तमाम बड़े-बड़े वादों और दावों आदि के भूल भुलैया से अलग हटकर, यह ईमानदार आंकलन जरूरी है कि क्या केंद्र व राज्य सरकारों बातें केवल छलावा पूर्ण हैं या फिर संविधान की सर्वसमाज हितैषी सच्ची मंशा के हिसाब से देश ने राजनीतिक, सामाजिक व आर्थिक लोकतंत्र के क्षेत्र में अपेक्षित विकास करके लोगों के जीवन स्तर में कुछ बहु-अपेक्षित सुधार किया है।

उन्होंने कहा कि देश की आजादी तथा उसके बाद बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के देश को वास्तव में महान बनाने वाले मानवतावादी एवं कल्याणकारी संविधान को लागू होने के बाद से लगभग 140 करोड़ की जनसंख्या वाले देश ने खासकर गरीबी व बेरोजगारी दूर करने के मामले में क्या विकास किया है। कुछ मुट्ठी भर अमीर और धनाढ्य तथा बाकी गरीब व बेरोजगार बहुजन लोग सरकार के थोड़े से अन्न के मोहताज क्यों बन गये हैं? इसका आंकलन ही नहीं बल्कि आत्म-चिंतन भी जरूरी है।

मायावती ने कहा है कि भारत अपने संवैधानिक मूल्यों के कारण दुनिया भर में नैतिक शक्ति के रूप में था, तो क्या वह स्थिति कायम है अर्थात् भारत दूसरों की नकल नहीं करता था बल्कि दुनिया भारत की तरफ देखती और सीखती थी, तो क्या वह स्थिति आज बरकरार है? केवल पड़ोसी देश में ही नहीं बल्कि विश्व परिदृश्य में भी विभिन्न देशों के हालात जिस तेजी से बदल रहे हैं, ऐसे में भारतीय लोकतंत्र एवं इसके संविधान का महत्व और बढ़ गया है। इसलिए सरकार देश को आत्मनिर्भर तथा लोगों की उम्मीदों को बढ़ाने वाला सार्थक प्रयास करती रहे तो यह उचित होगा, जिसके लिए संकीर्णतापूर्ण नहीं बल्कि संविधान के हिसाब से देश को जोड़ने वाली नीयत व नीति पर अमल करना जरूरी है।

घुसपैठियों और गैर देश के निवासियों के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि देश में घुसपैठियों/विदेशियों की पहचान करके उन्हें वोटर लिस्ट से अलग-थलग करना उचित व अनवरत प्रक्रिया रही है, लेकिन इसके लिए लगभग 100 करोड़ भारतीय नागरिकों व उनके परिवार वालों को सरकारी दस्तावेजों के भारी उलझनों में डालने की बजाय सरकार कोई दूसरा सुगम व बेहतर रास्ता अपनाए तो यह उचित होगा।

उन्होंने यह भी कहा कि सरकार के लाख प्रयासों के बावजूद अगर धर्म परिवर्तन रुकने का नाम नहीं ले रहा है तो फिर इसके लिए मूल समस्या की पहचान करके इसमें आवश्यक सुधार की जरूरत है। इसकी आड़ में विभाजनकारी राजनीति व हिंसा पर जितना जल्दी विराम लगे, उतना देशहित में उचित होगा।

अंत में महंगाई, गरीबी, बेरोजगारी, अशिक्षा, जातिवाद एवं सांप्रदायिकता का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इससे देश में बहुजन लोगों के बीच सामाजिक, राजनीतिक व आर्थिक असमानता की लाचारी तथा जीवन स्तर में हो रही लगातार गिरावट को लेकर बीएसपी काफी चिंतित भी है। सरकारों को इस पर ध्यान देना चाहिए, यही गणतंत्र दिवस पर सभी के संकल्प भी होना चाहिए।
 

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