ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को मिला अशोक चक्र, परेड में शामिल हुआ यूरोपियन यूनियन कंटीजेंट (लीड-1)

ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को मिला अशोक चक्र, परेड में शामिल हुआ यूरोपियन यूनियन कंटीजेंट (लीड-1)


नई दिल्ली, 26 जनवरी। गणतंत्र दिवस के अवसर पर वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को अशोक चक्र से सम्मानित किया गया है। 77वें गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कर्तव्य पथ पर शुभांशु शुक्ला को यह सम्मान प्रदान किया। ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला को मिला ‘अशोक चक्र’ देश का सर्वोच्च शांतिकालीन वीरता पुरस्कार है।

गौरतलब है कि शुभांशु शुक्ला ने एक्सिओम-4 मिशन के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन की यात्रा की थी। इसके मिशन पर उन्होंने 2025 में उड़ान भरी थी। भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अपनी स्पेस यात्रा के दौरान वहां कई रिसर्च की थीं। उन्होंने अंतरिक्ष में खेती भी की थी। शुभांशु शुक्ला ने स्पेस में मेथी और मूँग की खेती की थी। उन्होंने अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में मिशन की सफलता सुनिश्चित की। उनकी पेशेवर दक्षता, नेतृत्व और शांतचित्त निर्णय लेने की क्षमता को इस सर्वोच्च सम्मान के माध्यम से मान्यता मिली है।

वहीं, कर्तव्य पथ पर परेड आरंभ होते ही परमवीर चक्र एवं अशोक चक्र विजेता खुली जीप में परेड स्थल पर पहुंचे। सर्वोच्च बहादुरी पुरस्कार से सम्मानित विजेता, परेड कमांडर का अनुकरण कर रहे थे और इनमें परमवीर चक्र और अशोक चक्र विजेता शामिल रहे। परमवीर चक्र से सम्मानित विजेताओं में सूबेदार मेजर (ऑनरेरी कैप्टन) योगेन्द्र सिंह यादव, पीवीसी (सेवानिवृत्त), 18 ग्रेनेडियर्स और सूबेदार मेजर संजय कुमार, पीवीसी, 13 जम्मू एवं कश्मीर राइफल्स शामिल थे। वहीं, अशोक चक्र से सम्मानित विजेता मेजर जनरल सी ए पिठावाला (सेवानिवृत्त) व कर्नल डी श्रीराम कुमार थे।

गौरतलब है कि परमवीर चक्र युद्ध में असाधारण वीरता का परिचय देते हुए अदम्य साहस दिखाने वाले सैनिकों को दिया जाता है। अशोक चक्र अन्य परिस्थितियों में असाधारण वीरता का प्रदर्शन और सर्वोच्च प्रदर्शन देने वाले शूरवीरों को प्रदान किया जाता है।

वहीं इस वर्ष यूरोपियन यूनियन का कंटीजेंट भी गणतंत्र दिवस परेड में शामिल हुआ। तीन जिप्सी पर यूरोपीय संघ (ईयू) के ध्वज देखने को मिले। गणतंत्र दिवस परेड में कर्नल फ्रेडरिक साइमन स्प्रुइज्ट, यूरोपीय संघ सैन्य स्टाफ के महानिदेशक की ओर से यूरोपीय संघ के सैन्य प्रतिनिधित्व का नेतृत्व किया गया। वे एक औपचारिक समारोहिक जिप्सी पर सवार थे। इस फॉर्मेशन में दूसरी औपचारिक समारोहिक जिप्सी के समन्वय में दाईं ओर की जिप्सी पर यूरोपीय संघ का ध्वज था। यह ध्वज यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों की संस्थागत एकता का एवं यूरोपीय संघ के सैन्य स्टाफ (ईयूएमएस) के ध्वज के साथ, सुरक्षा और रक्षा के लिए यूरोपीय संघ संस्थागत अवसंरचना में स्थायी सैन्य निकाय का प्रतीक है।

पहली जिप्सी से समन्वय में, बाईं ओर की जिप्सी पर यूरोपीय संघ की सामान्य सुरक्षा और रक्षा नीति के तहत हिंद महासागर और लाल सागर क्षेत्रों में आयोजित, यूरोपीय संघ के नौसेना बल अटलांटा और एस्पिड्स नामक दो यूरोपीय संघ नौसैनिक अभियानों के ध्वज वहन करती दिखी। ये ध्वज अंतरराष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा के समर्थन में यूरोपीय संघ की परिचालन उपस्थिति का प्रतिनिधित्व करते हैं।

गौरतलब है कि साधारण साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान के लिए सशस्त्र बलों के 70 कर्मियों को वीरता पुरस्कार प्रदान करने की स्वीकृति दी है। इनमें छह पुरस्कार मरणोपरांत दिए जा रहे हैं। इन वीरता पुरस्कारों में 1 अशोक चक्र, 3 कीर्ति चक्र, 13 शौर्य चक्र ( 1 मरणोपरांत), 1 बार टू सेना मेडल (वीरता), 44 सेना मेडल (वीरता) ( 5 मरणोपरांत), 6 नौसेना मेडल (वीरता) व 2 वायु सेना मेडल (वीरता) शामिल हैं।
 

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