उज्जैन के आर्कियोलॉजिस्ट और मुरादाबाद के किसान को पद्मश्री सम्मान, परिवार में खुशी का माहौल

उज्जैन के आर्कियोलॉजिस्ट और मुरादाबाद के किसान को मिलेगा पद्म श्री सम्मान, परिवार में खुशी का माहौल


उज्जैन/मुरादाबाद, 26 जनवरी। केंद्र सरकार ने पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्म श्री पुरस्कारों का ऐलान कर दिया है। पद्म श्री पाने वालों में आर्कियोलॉजिस्ट भी शामिल हैं और किसान भी। उज्जैन के वरिष्ठ आर्कियोलॉजिस्ट डॉ. नारायण व्यास और मुरादाबाद के किसान रघुपत सिंह को पद्मश्री दिए जाने की घोषणा हुई है।

उज्जैन के वरिष्ठ आर्कियोलॉजिस्ट डॉ. नारायण व्यास ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। मैं 2017 से इस सम्मान के लिए कोशिश कर रहा हूं। अब मुझे खुशी है कि यह सम्मान मिला है। हम सालों से पुरातत्व से जुड़े काम कर रहे हैं।

उन्होंने बताया कि उनके पिता स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे, उन्हीं के नाम पर उज्जैन में दौलतगंज चौराहा है। मेरे पिता जी को पुरानी चीजों का काफी शौक था, जिसका असर मुझ पर भी पड़ा। मैंने पुरातत्व में एमए किया। इसके बाद कई जगहों पर घूमने गया। इससे दिलचस्पी और बढ़ गई, लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी। मेरे पास कमाई का कोई साधन नहीं था, इसलिए मैंने किताब बेचने का काम शुरू किया।

हालांकि, बाद में वह भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण से जुड़ गए। साल 2009 में वह रिटायर हो गए। इसके बाद उन्होंने पूरी तरह से ऐतिहासिक धरोहर को लेकर काम शुरू किया।

उन्होंने कहा कि मैं छात्रों के बीच पुरातत्व की जानकारी देने के लिए भी जाता हूं। उन्होंने बताया कि शहीदों के जन्मस्थान से जुड़ी 150 जगहों की मिट्टी उन्होंने एकत्र की हुई है।

डॉ. नारायण व्यास ने वर्षों तक पुरातत्व, इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर के संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दिया है। उज्जैन सहित मालवा अंचल की प्राचीन विरासत को देश-दुनिया तक पहुंचाने में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है।

वहीं, मुरादाबाद के बिलारी गांव निवासी किसान रघुपत सिंह को मरणोपरांत पद्मश्री सम्मान के लिए चुना गया है। उन्होंने विलुप्त हो चुकी सब्जियों की खेती और बीजों के संरक्षण को अपना जीवन समर्पित किया। 1 जुलाई 2025 को उनका निधन हो गया था। अब यह सम्मान उनके बेटे सुरेंद्र पाल सिंह प्राप्त करेंगे।

सुरेंद्र पाल के अनुसार, उनके पिता 1980 से कृषि क्षेत्र में सक्रिय थे और विलुप्त फसलों के पुनरुद्धार, बीज शोधन, नई प्रजातियों के विकास और विश्वविद्यालयों को बीज उपलब्ध कराने का कार्य करते थे। उन्हें पंतनगर विश्वविद्यालय सहित कई संस्थानों से सम्मान मिल चुका था। आज पूरा परिवार कृषि से जुड़ा है और उनके कार्य को आगे बढ़ा रहा है। उनके पिता को कई तरह के सम्मान मिल चुके थे।

सुरेंद्र पाल ने बताया कि पहले लोगों को पौधों के बारे में जानकारी नहीं थी, तो उनके पिता ने धीरे-धीरे सब्जियों के पौधे लगाना शुरू किया। उन्होंने बताया कि आज उनके पास लगभग 36 किस्म के राजमा हैं। कई बार उन्होंने पद्म श्री के लिए आवेदन दिया था, लेकिन इस बार उन्हें यह सम्मान मिला। हमें बहुत खुशी हुई। वह क्षेत्र में ‘कृषि पंडित’ के नाम से जाने जाते थे।
 
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