कहीं राजद का सर्वनाश न हो जाए, तेजस्वी यादव को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की चर्चाओं पर जदयू का कटाक्ष

कहीं राजद का सर्वनाश न हो जाए, तेजस्वी यादव को कार्यकारी अध्यक्ष बनाने की चर्चाओं पर जदयू का कटाक्ष


पटना, 25 जनवरी। तेजस्वी यादव को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) का कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने की अटकलों पर जनता दल-यूनाइटेड (जदयू) ने कटाक्ष किया है। जदयू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा कि तेजस्वी यादव की दोहरी जिम्मेदारी कहीं उनकी पार्टी का सर्वनाश न कर दे।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में राजीव रंजन प्रसाद ने कहा, "राजद का वजूद खात्मे की ओर बढ़ रहा है और तेजस्वी यादव की ताजपोशी की बात हो रही है। जब से तेजस्वी की जिम्मेदारियां बढ़ी हैं, राजद जमीनी स्तर पर कमजोर हो रही है। अब एक कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया जाएगा, लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि नेता प्रतिपक्ष रहते तेजस्वी यादव जितने गैरजिम्मेदार दिखे हैं, तो दोहरी जिम्मेदारी कहीं उनकी पार्टी का सर्वनाश न कर दे।"

राजीव रंजन प्रसाद ने कर्पूरी ठाकुर को लेकर तेजस्वी यादव के बयान पर भी पलटवार किया। जदयू प्रवक्ता ने कहा, "जिन नेताओं के नक्शेकदम पर वे चलने की कोशिश कर रहे हैं, उन्हें भी अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए। कर्पूरी ठाकुर एक दिन में कर्पूरी नहीं बने थे। यह सालों की तपस्या, लोगों के लिए संघर्ष और महत्वपूर्ण फैसलों की वजह से हुआ।"

राजीव रंजन ने आगे कहा, "राजनीतिक तौर पर असहमति हो सकती है, लेकिन लालू यादव एक जनआंदोलन की उपज हैं। बिहार आंदोलन में जेपी नारायण के आह्वान के बाद वह शामिल हुए थे। तेजस्वी यादव भले लालू और कर्पूरी ठाकुर का नाम लेकर खुद को बड़ा बनाने की कोशिश करें, लेकिन पार्टी के नेता और कार्यकर्ता ऐसा नहीं मानते।"

जदयू प्रवक्ता ने यह भी कहा कि घिसे-पिटे बयान राजद की डूबती नाव को नहीं बचा पाएंगे। पार्टी के नेता और कार्यकर्ता तेजस्वी यादव के घमंड और गैर-जिम्मेदाराना रवैये से असहज हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि पार्टी के अंदर से बागी सुर उठते रहते हैं, चाहे वह रोहिणी आचार्य का हालिया पोस्ट हो या भाई वीरेंद्र समेत अन्य नेताओं के बयान हों, इससे बिल्कुल साफ है कि राजद की स्थिति आने वाले समय में और कमजोर होगी।

कांग्रेस से नसीमउद्दीन सिद्दीकी के इस्तीफे पर जदयू प्रवक्ता राजीव रंजन प्रसाद ने कहा, "उत्तर प्रदेश में कांग्रेस समाप्ति की ओर तेजी से बढ़ रही है। राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस लगातार एक जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका नहीं निभा पाई, जो उनकी लाचारी को भी दिखाता है। असल कांग्रेसियों को पार्टी की बिगड़ती स्थिति के बाद सख्त ऐतराज है।

नसीमउद्दीन सिद्दीकी ने जो कहा है, वह इसी सच्चाई को दिखाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों से राहुल गांधी के बारे में जो आलोचनात्मक बयान आ रहे हैं, उन्हें आत्ममंथन करना चाहिए और बिगड़ती हुई कांग्रेस की स्थितियों को समय पर संभालना चाहिए।"
 

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