गढ़चिरौली, 24 जनवरी। आजादी के 78 वर्ष बाद गढ़चिरौली जिले में नक्सलगढ़ माना जाने वाला बिनागुंडा गांव एक ऐतिहासिक बदलाव का साक्षी बना है। वर्षों तक नक्सली प्रभाव और प्रशासन की सीमित मौजूदगी झेलने वाले इस क्षेत्र में पहली बार पुलिस सहायता केंद्र की स्थापना की गई है। खास बात यह है कि यह केंद्र महज 24 घंटे में तैयार किया गया, जो सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
इतिहास में पहली बार 26 जनवरी 2026 को बिनागुंडा गांव में राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा फहराया जाएगा। यह क्षण न केवल प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह नक्सल प्रभावित इलाके में लोकतंत्र, सुरक्षा और राष्ट्रीय एकता का मजबूत संदेश भी देगा।
बिनागुंडा गांव उपपोस्टे लाहेरी से लगभग 17 किलोमीटर और छत्तीसगढ़ सीमा से केवल 8 किलोमीटर दूर स्थित है। लंबे समय से यह इलाका नक्सली गतिविधियों के कारण अत्यंत संवेदनशील रहा है। सुरक्षा की स्थायी व्यवस्था न होने से विकास कार्य बाधित थे और ग्रामीण भय के माहौल में जीवन व्यतीत कर रहे थे। पुलिस सहायता केंद्र की स्थापना से अब न केवल नक्सली गतिविधियों पर नियंत्रण संभव होगा, बल्कि प्रशासन की स्थायी और सीधी पहुंच भी सुनिश्चित हो सकेगी।
पुलिस सहायता केंद्र के निर्माण के लिए गढ़चिरौली पुलिस ने एक अभूतपूर्व अभियान चलाया। इस दौरान 1050 पुलिसकर्मियों, 11 जेसीबी मशीनों, 10 ट्रेलरों, 5 पोकलेन मशीनों और 40 ट्रकों की मदद से दुर्गम जंगलों और कच्चे रास्तों के बीच केवल 24 घंटे में पूरा केंद्र खड़ा किया गया। यह अभियान पुलिस की मजबूत रणनीति और दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।
केंद्र की सुरक्षा के लिए बहुस्तरीय बंदोबस्त किया गया है। यहां 4 वरिष्ठ अधिकारियों और 56 पुलिसकर्मियों के साथ एसआरपीएफ ग्रुप 19 की दो प्लाटून, सीआरपीएफ की 9वीं बटालियन की डी कंपनी के 79 जवान और विशेष अभियान बल के 8 दलों के 200 कमांडो तैनात किए गए हैं। इस मजबूत सुरक्षा व्यवस्था से यह साफ हो गया है कि अब बिनागुंडा में कानून व्यवस्था से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
इस ऐतिहासिक मौके पर विशेष पुलिस महानिरीक्षक (नक्सल विरोधी अभियान) संदीप पाटील, पुलिस उप-महानिरीक्षक गडचिरोली परिक्षेत्र अंकित गोयल और पुलिस अधीक्षक गडचिरोली नीलोत्पल समेत कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने कहा कि यह पुलिस सहायता केंद्र केवल एक सुरक्षा चौकी नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास का प्रवेश द्वार साबित होगा।
26 जनवरी 2026 को होने वाला तिरंगा फहराने का कार्यक्रम नक्सल भय से मुक्ति, प्रशासन की स्थायी मौजूदगी, लोकतंत्र की मजबूती और विकास की शुरुआत का प्रतीक बनेगा। स्थानीय ग्रामीणों में भी इस बदलाव को लेकर उत्साह देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि पहली बार उन्हें सुरक्षा का अहसास हुआ है और अब सड़क निर्माण, मोबाइल नेटवर्क, परिवहन, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के तेज विकास की उम्मीद जगी है।
नक्सलगढ़ के नाम से पहचाना जाने वाला बिनागुंडा अब विकासगढ़ की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। जहां कभी नक्सलियों का डर हावी था, वहां अब तिरंगा, पुलिस और विकास की मजबूत मौजूदगी नए भारत की तस्वीर पेश कर रही है।