देहरादून, 24 जनवरी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखंड सरकार की 'जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार' पहल ने नई ऊंचाइयां छू ली हैं। यह अभियान जनकल्याणकारी योजनाओं को आमजन तक पहुंचाने का एक प्रभावी माध्यम बन गया है, जिसमें सरकार स्वयं जनता के द्वार पर जाकर समस्याओं का समाधान कर रही है।
प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में शनिवार को कुल 7 जनसेवा कैंप आयोजित किए गए, जिनमें 11,738 नागरिकों ने सक्रिय भागीदारी की और विभिन्न सरकारी योजनाओं का प्रत्यक्ष लाभ प्राप्त किया। इन कैंपों के माध्यम से लोगों को प्रमाण पत्र, पेंशन, राशन कार्ड, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा संबंधी सहायता और अन्य विभागीय सुविधाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध कराई गईं। इससे समय, धन और श्रम की भारी बचत हुई है।
अब तक प्रदेश में कुल 459 जनसेवा कैंप आयोजित हो चुके हैं, जिनमें 3,68,730 से अधिक नागरिकों को सीधा लाभ मिला है। यह आंकड़ा मुख्यमंत्री धामी की उस प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है जिसके तहत योजनाओं का लाभ अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक अवश्य पहुंचे। अभियान की शुरुआत से ही विभिन्न जिलों में बड़े पैमाने पर कैंप लगाए गए हैं। उदाहरण के लिए, हाल के दिनों में एक दिन में 204 कैंप लगाकर 1.35 लाख से अधिक लोगों को लाभान्वित किया गया, जबकि किसी अन्य दिन एक ही दिन में 7,876 नागरिकों तक पहुंचा गया। ऐसे रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि यह पहल जनता के बीच लोकप्रिय हो रही है।
जनसेवा कैंपों में विभिन्न विभाग जैसे राजस्व, स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज कल्याण, कृषि, पशुपालन आदि की योजनाएँ एक छत के नीचे उपलब्ध होती हैं। प्रमाण पत्र बनाने, शिकायत निवारण, पेंशन वितरण और अन्य सेवाओं के लिए लोगों को अब सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते। मुख्यमंत्री धामी का स्पष्ट निर्देश है कि प्रशासनिक मशीनरी जनता की सेवा के लिए हो, न कि जनता प्रशासन के लिए। इस दृष्टि से “जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार” न केवल एक नारा है, बल्कि व्यावहारिक रूप से लागू हो रहा है।
यह अभियान प्रशासन और जनता के बीच विश्वास की मजबूत कड़ी बन रहा है। दूरदराज के गांवों, पहाड़ी क्षेत्रों और शहरी बस्तियों में भी कैंपों की व्यवस्था से हर वर्ग के लोग लाभान्वित हो रहे हैं। मुख्यमंत्री धामी ने बार-बार जोर दिया है कि सुशासन का मतलब पारदर्शिता, जवाबदेही और त्वरित सेवा प्रदान करना है।