जादवपुर सीट: बंगाल की राजनीति का 'गेम चेंजर', वाम गढ़ से टीएमसी तक सफर; तय करती है सूबे की दिशा

जादवपुर विधानसभा: बंगाल की राजनीति का 'टर्निंग पॉइंट', वाम गढ़ से टीएमसी तक का सफर


कोलकाता, 13 मार्च। पश्चिम बंगाल की राजनीति में कुछ विधानसभा सीटें ऐसी हैं, जिनका प्रभाव सिर्फ चुनावी नतीजों तक सीमित नहीं रहता। ये सीटें प्रदेश की राजनीतिक दिशा को तय करती है। दक्षिण कोलकाता की जादवपुर विधानसभा सीट भी उन्हीं में से एक है।

जादवपुर विधानसभा क्षेत्र सामान्य श्रेणी की सीट है और इसका अधिकांश हिस्सा कोलकाता नगर निगम के तहत आता है, जबकि इसका एक छोटा हिस्सा दक्षिण 24 परगना जिले में पड़ता है। यह क्षेत्र कोलकाता नगर निगम के लगभग 10 वार्डों से मिलकर बना है और जादवपुर लोकसभा सीट के सात विधानसभा खंडों में से एक है। पूरी तरह शहरी स्वरूप वाली इस सीट पर ग्रामीण मतदाता नहीं हैं, जो इसे बंगाल की कई अन्य सीटों से अलग बनाता है।

जादवपुर सीट का गठन 1967 में हुआ था और लंबे समय तक यह भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की मजबूत गढ़ मानी जाती रही। अब तक यहां 1983 के उपचुनाव सहित कुल 15 चुनाव हो चुके हैं, जिनमें से 13 बार माकपा ने जीत दर्ज की। यह सीट खास तौर पर पश्चिम बंगाल के पूर्व मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य से जुड़ी रही है। उन्होंने 1987 से 2006 तक लगातार पांच चुनाव जीतकर इस सीट को वामपंथी राजनीति का प्रतीक बना दिया था।

2011 का विधानसभा चुनाव जादवपुर के इतिहास में निर्णायक साबित हुआ। उस चुनाव में ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार मनीष गुप्ता ने बुद्धदेव भट्टाचार्य को हरा दिया। इस हार को प्रदेश की राजनीति में एक बड़े परिवर्तन का संकेत माना गया, क्योंकि उसी चुनाव में ममता बनर्जी के नेतृत्व में तृणमूल कांग्रेस ने 34 साल पुराने वाममोर्चा शासन का अंत कर दिया। 2021 के विधानसभा चुनाव में भी जादवपुर सीट तृणमूल कांग्रेस के खाते में गई।

जादवपुर सिर्फ राजनीतिक ही नहीं, बल्कि शैक्षणिक और बौद्धिक गतिविधियों के लिए भी जाना जाता है। यहां स्थित जादवपुर विश्वविद्यालय देश के प्रमुख उच्च शिक्षा संस्थानों में शामिल है। इसके अलावा, कई अन्य प्रमुख वैज्ञानिक संस्थान भी इसी क्षेत्र में हैं।

वर्तमान में यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा, खुदरा व्यापार और सर्विस सेक्टर पर आधारित है। जादवपुर का भूगोल पूरी तरह शहरी और सपाट है, जैसा कि कोलकाता के दक्षिणी उपनगरों में आम तौर पर देखने को मिलता है। यह इलाका सड़क और रेल मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। जादवपुर रेलवे स्टेशन यहां की एक प्रमुख परिवहन कड़ी है, जो शहर के अलग-अलग हिस्सों से इसे जोड़ती है।
 

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