AI युग में भारत की बड़ी छलांग: डेटा सेंटर क्षमता 4 गुना बढ़ी, अब 1500 मेगावाट से देगा क्रांति को गति

भारत में डेटा सेंटर क्षमता 2020 के बाद 4 गुना बढ़कर करीब 1,500 मेगावाट हुई: सरकार


नई दिल्ली, 13 मार्च। सरकार ने शुक्रवार को संसद को बताया कि भारत का डेटा सेंटर उद्योग तेजी से बढ़ रहा है। देश की कुल डेटा सेंटर क्षमता 2020 में करीब 375 मेगावाट थी, जो 2025 तक चार गुना बढ़कर लगभग 1,500 मेगावाट हो गई है।

राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के विकास को बढ़ावा देने के लिए एआई कंप्यूट क्षमता ढांचे के तहत 14 पंजीकृत सेवा प्रदाताओं और डेटा सेंटरों के माध्यम से लगभग 38,231 जीपीयू उपलब्ध कराए गए हैं।

उन्होंने कहा कि ये कंप्यूटिंग संसाधन स्टार्टअप, शोधकर्ताओं, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य पात्र उपयोगकर्ताओं को औसतन 65 रुपए प्रति घंटे की सब्सिडी दर पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं, जो वैश्विक औसत लागत का लगभग एक-तिहाई है।

देश के प्रमुख तकनीकी केंद्रों जैसे मुंबई, नवी मुंबई, हैदराबाद, बेंगलुरु, नोएडा और जामनगर में डेटा सेंटर स्थापित किए गए हैं।

मंत्री ने कहा कि सरकार डेटा सेंटर इकोसिस्टम की बढ़ती जरूरतों, जैसे बिजली और पानी की मांग, से पूरी तरह अवगत है।

ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार, डेटा सेंटर से बिजली की मांग 2031-32 तक बढ़कर लगभग 13.56 गीगावाट तक पहुंच सकती है, क्योंकि एआई और बड़े पैमाने की कंप्यूटिंग सेवाओं के साथ यह क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है।

उन्होंने बताया कि देश की राष्ट्रीय ट्रांसमिशन इंफ्रास्ट्रक्चर को लगातार बढ़ाया जा रहा है ताकि बढ़ती बिजली मांग को पूरा किया जा सके और सभी क्षेत्रों में विश्वसनीय बिजली आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।

हाल ही में लागू किया गया सस्टेनेबल हार्नेसिंग एंड एडवांसमेंट ऑफ न्यूक्लियर एनर्जी फॉर ट्रांसफॉर्मिंग इंडिया (एसएचएएनटीआई) एक्ट भी भविष्य में छोटे मॉड्यूलर और माइक्रो न्यूक्लियर रिएक्टरों के उपयोग को संभव बनाकर एआई और डेटा सेंटर जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए विश्वसनीय बिजली उपलब्ध कराने में मदद करेगा।

मंत्री ने बताया कि डेटा सेंटर में पानी की खपत इस्तेमाल की जाने वाली कूलिंग तकनीक पर निर्भर करती है।

उन्होंने कहा कि डेटा सेंटर जैसे औद्योगिक उपयोगों के लिए भूजल के इस्तेमाल को जल शक्ति मंत्रालय के दिशानिर्देशों के तहत नियंत्रित किया जाता है।

पानी की खपत कम करने के लिए उद्योग अब डायरेक्ट-टू-चिप लिक्विड कूलिंग, एडियाबेटिक कूलिंग और इमर्शन कूलिंग जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर रहा है।

इसके अलावा कंपनियां हाई-डेंसिटी रैक सिस्टम भी लगा रही हैं ताकि हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग और एआई वर्कलोड को बेहतर तरीके से संभाला जा सके और बिजली व पानी की खपत भी कम हो।
 

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