नई दिल्ली, 13 मार्च। केंद्र सरकार ने प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को राहत देने के लिए बड़ी आर्थिक सहायता की घोषणा की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई एक उच्च स्तरीय समिति (एचएलसी) की बैठक में कुल 1,912.99 करोड़ रुपए की अतिरिक्त केंद्रीय सहायता को मंजूरी दी गई है। यह सहायता आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, नागालैंड और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर को दी जाएगी।
सरकार के अनुसार यह मदद वर्ष 2025 के दौरान आई प्राकृतिक आपदाओं, जैसे बाढ़, फ्लैश फ्लड, क्लाउडबर्स्ट, भूस्खलन और चक्रवाती तूफान चक्रवात मोंथा से प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्वास और राहत कार्यों के लिए दी जा रही है।
उच्च स्तरीय समिति के फैसले के मुताबिक राज्यों को अलग-अलग राशि स्वीकृत की गई है। इसमें आंध्र प्रदेश को 341.48 करोड़ रुपए, छत्तीसगढ़ को 15.70 करोड़ रुपए, गुजरात को 778.67 करोड़ रुपए, हिमाचल प्रदेश को 288.39 करोड़ रुपए, नागालैंड को 158.41 करोड़ रुपए और जम्मू-कश्मीर को 330.34 करोड़ रुपए की अतिरिक्त सहायता प्रदान की जाएगी।
यह पूरी राशि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) से दी जा रही है। हालांकि इसमें संबंधित राज्यों के राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) में मौजूद शुरुआती बैलेंस के 50 प्रतिशत को समायोजित किया जाएगा।
केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह अतिरिक्त सहायता पहले से जारी फंड के अलावा है। यानी राज्यों को पहले से जो राशि एसडीआरएफ के तहत उपलब्ध कराई गई थी, उसके ऊपर यह नई आर्थिक मदद दी जा रही है। केंद्र सरकार प्राकृतिक आपदाओं के समय राज्य सरकारों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहती है और हर संभव सहायता प्रदान करती है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान केंद्र सरकार ने राज्यों को राहत और आपदा प्रबंधन के लिए बड़ी राशि जारी की है। सरकार के मुताबिक इस अवधि में 28 राज्यों को एसडीआरएफ के तहत 20,735.20 करोड़ रुपए जारी किए गए हैं, जबकि 21 राज्यों को एनडीआरएफ के तहत 3,628.18 करोड़ रुपए की सहायता दी गई है।
इसके अलावा आपदा से बचाव और जोखिम कम करने के लिए भी फंड जारी किए गए हैं। केंद्र सरकार ने 23 राज्यों को राज्य आपदा शमन कोष से 5,373.20 करोड़ रुपए और 21 राज्यों को राष्ट्रीय आपदा शमन कोष से 1,189.56 करोड़ रुपए प्रदान किए हैं।
सरकार का कहना है कि इन सभी कदमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित राज्यों को राहत कार्यों, पुनर्वास और बुनियादी ढांचे की बहाली के लिए पर्याप्त संसाधन मिल सकें। साथ ही केंद्र और राज्य मिलकर तेजी से प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचा सकें, ताकि लोगों को जल्द से जल्द सामान्य जीवन में लौटने में मदद मिल सके।