चंडीगढ़, 12 मार्च। शिरोमणी अकाली दल (एसएडी) के नेता सरदार बिक्रम सिंह मजीठिया ने पंजाब में 'पंजीरी घोटाले' का गंभीर आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री भगवंत मान की सीधी निगरानी में हुए 1000 से 1500 करोड़ रुपए के कथित घोटाले की सीबीआई जांच की मांग की है। उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि यह घोटाला आंगनवाड़ी केंद्रों के माध्यम से स्तनपान कराने वाली माताओं और शिशुओं को दिए जाने वाले पौष्टिक राशन, विशेषकर पंजीरी की खरीद और आपूर्ति से जुड़ा है।
मजीठिया ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवंत मान ने सहकारिता मंत्री के रूप में केंद्र सरकार के एकीकृत बाल विकास सेवा (आईसीडीएस) मानकों के विपरीत काम किया। उन्होंने कहा कि 2022 से वेरका (पंजाब मिल्कफेड) के पांच प्लांट बंद कर दिए गए, जहां पंजीरी बनती थी। इसके बाद मार्कफेड को जिम्मेदारी दी गई, जिसने चार निजी कंपनियों को टेंडर आवंटित किए।
ये कंपनियां, चंडीगढ़ स्वीट्स, इंटरलिंक फूड्स, प्रकाश मसाला और एमपी एग्रोटॉनिक्स, कथित तौर पर काली सूची में थीं। मजीठिया ने दावा किया कि चारों कंपनियों को एक ही घंटे में टेंडर दिए गए और इनका पता भी एक ही है। यह प्रक्रिया 2022 से जारी है, जिसमें सालाना 500 करोड़ रुपए से अधिक खर्च होते हैं और टेंडर मूल्य बढ़ाए जाते हैं।
उन्होंने कहा कि इन कंपनियों द्वारा सप्लाई की गई पंजीरी की गुणवत्ता घटिया है, जिसमें फंगस संक्रमण तक की शिकायतें आई हैं। विभागीय कर्मचारियों और एक सीडीपीओ ने इसकी शिकायत की, जिसके कारण उन्हें निलंबित किया गया, लेकिन बाद में बहाल कर दिया गया। तत्कालीन मिल्कफेड अध्यक्ष नरेंद्र शेरगिल ने भी घटिया सामग्री (देसी घी की बजाय रिफाइंड तेल) पर ध्यान दिलाया था, लेकिन उन्हें इस्तीफा देना पड़ा। मजीठिया ने कहा कि यह घोटाला माताओं और नवजात शिशुओं के स्वास्थ्य से खिलवाड़ है।
मजीठिया ने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि काली सूची वाली कंपनियों को ठेके क्यों दिए जा रहे हैं। उन्होंने विडंबना जताई कि आप नेता संजय सिंह ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग की थी, जहां इसी तरह की कंपनी को ठेका दिया गया था, लेकिन पंजाब में यही हो रहा है। उन्होंने कहा कि केवल सीबीआई जांच से घोटाले की पूरी सच्चाई सामने आएगी और इसमें शामिल लोगों को सजा मिल सकेगी।