बेंगलुरु: सोने की तस्करी-मनी लॉन्ड्रिंग पर ED का शिकंजा, 127 किलो गोल्ड केस में मुकदमा दर्ज

बेंगलुरु: ईडी ने 127 किलो सोने की तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में दायर किया मुकदमा


नई दिल्ली, 12 मार्च। बड़े पैमाने पर सोने की तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने बेंगलुरु स्थित विशेष न्यायालय में हर्षवर्दिनी रान्या उर्फ रान्या राव, तरुण कोंडुरु और साहिल सकारिया जैन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।

ईडी ने यह जांच 7 मार्च 2025 को नई दिल्ली में सीबीआई द्वारा दर्ज की गई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी। यह एफआईआर राजस्व खुफिया निदेशालय की शिकायत पर दर्ज की गई थी।

एफआईआर में बताया गया है कि 3 मार्च 2025 को केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे, बेंगलुरु से हर्षवर्दिनी रान्या के पास विदेशी मूल के 14.213 किलो सोने को डीआरआई ने जब्त किया, जिसकी कीमत लगभग 12.56 करोड़ रुपए थी। बाद में तलाशी के दौरान 2.06 करोड़ रुपए कीमत के सोने के आभूषण और 2.67 करोड़ रुपए भारतीय मुद्रा बरामद की गई। डीआरआई ने इस मामले में सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 की धारा 135 के तहत भी अभियोजन याचिका दायर की थी।

पीएमएलए के तहत ईडी की जांच में पता चला कि मार्च 2024 से मार्च 2025 तक कुल 127.287 किलो सोना भारत में तस्करी के जरिए लाया गया, जिसकी कीमत लगभग 102.55 करोड़ रुपए थी। तस्करी किया गया सोना घरेलू बाजार में हैंडलर और ज्वैलर्स के नेटवर्क के जरिए बेचा गया। बिक्री की राशि कैश में मिली और भारत और विदेश में हल चैनलों के जरिए भेजी गई। यह पैसा कई बैंक खातों और लेनदेन के जरिए फिर से लेवल किया गया और वैध व्यवसाय के रूप में दिखाया गया।

21 और 22 मई 2025 को पीएमएलए की धारा 17 के तहत कर्नाटक में 16 जगहों पर जब्त की गई, जिसमें अतिरिक्त दस्तावेज, डिजिटल उपकरण, भारतीय और विदेशी मुद्रा जब्त की गई। जांच के दौरान कई लोगों के बयान पीएमएलए की धारा 50 के तहत रिकॉर्ड किए गए।

जांच में यह भी सामने आया कि हर्षवर्दिनी रान्या के नाम पर 34.12 करोड़ रुपए की अचल संपत्तियों को पीएमएलए की धारा 5(1) के तहत अस्थायी रूप से जब्त किया गया।

जांच में पता चला कि सोने की तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग एक संगठित तरीके से की गई। इसमें विदेश से सोने की खरीद, भारत में अवैध आयात, नकद बिक्री और होल्डिंग व बैंकिंग चैनलों के माध्यम से डिपॉजिट का लॉन्ड्रिंग शामिल है। इस तरह की गतिविधियां कानूनी व्यापार और वित्तीय प्रणाली को कमजोर करती हैं और जनता के विश्वास को कम करती हैं।

इस मामले में पीएमएलए की धारा 3 और 4 के तहत मनी लॉन्ड्रिंग के अपराध के लिए अभियोजन याचिका दायर की गई है। जांच अभी भी जारी है।
 

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