नई दिल्ली, 12 मार्च। सुप्रीम कोर्ट ने टोक्यो के रेनको-जी मंदिर से नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अस्थियों को भारत लाने की मांग वाली याचिका पर फिलहाल सुनवाई करने से इनकार कर दिया है। सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि इस मामले पर सुनवाई तो की जाएगी, लेकिन नेताजी के वारिस खुद कोर्ट में आकर याचिका दायर करें।
सीजेआई ने कहा कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस देश के सबसे महान नेताओं में से एक थे, लेकिन कोर्ट इन याचिकाओं के पीछे के मकसद और उनके समय को अच्छी तरह समझता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना वारिस के कोर्ट आने पर इस तरह का फैसला नहीं लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि वारिस को याचिका दायर करने दीजिए, हम उस पर सुनवाई करेंगे।
याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ वकील ए.एम. सिंघवी ने कोर्ट को बताया कि नेताजी का केवल एक ही जीवित वारिस है, उनकी बेटी अनीता बोस फाफ। फिलहाल याचिका को सुप्रीम कोर्ट से वापस ले लिया गया है।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि केंद्र सरकार टोक्यो के रेनको-जी मंदिर से नेताजी की अस्थियां वापस लाने में नाकाम रही है, जिसके कारण उनकी बेटी अनीता बोस भारत में उनका सम्मानजनक अंतिम संस्कार नहीं कर पा रही हैं। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में हस्तक्षेप कर सरकार को निर्देश दे कि अस्थियों को भारत लाया जाए।
रेनको-जी मंदिर में रखी अस्थियां 18 सितंबर 1945 से सुरक्षित हैं, जो नेताजी की मृत्यु के बाद वहां रखी गई थीं। नेताजी की मौत 18 अगस्त 1945 को ताइवान में एक विमान दुर्घटना में होने की आधिकारिक रिपोर्ट है, लेकिन इस पर लंबे समय से विवाद चल रहा है। मुखर्जी आयोग समेत कई जांचों में अलग-अलग निष्कर्ष आए हैं और अस्थियों की डीएनए जांच की मांग भी समय-समय पर उठती रही है।
नेताजी के परिवार के कुछ सदस्यों ने पहले भी अस्थियों को भारत लाने और उनका अंतिम संस्कार करने की अपील की है।