डिजिटल उपकरणों की शक्ति को पूरी मानवता तक पहुंचाने से मानवाधिकारों को मिलता है बढ़ावा : भारत

डिजिटल उपकरणों की शक्ति को पूरी मानवता तक पहुंचाने से मानवाधिकारों को मिलता है बढ़ावा : भारत


संयुक्त राष्ट्र, 12 मार्च। भारत के अनुसार डिजिटल उपकरणों की शक्ति को पूरी मानवता तक पहुंचाना मानवाधिकारों को बढ़ावा देने में मदद करता है, क्योंकि सभी लोगों के जीवन में सुधार करना इसकी वास्तविक क्षमता को साकार करने के लिए आवश्यक है।

भारत के विदेश मंत्रालय में सचिव (पश्चिम) सिबि जॉर्ज ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में कहा कि भारत ने सभी लोगों के अधिकारों तक व्यापक स्तर पर पहुंच बढ़ाने के लिए डिजिटल उपकरणों का प्रभावी उपयोग किया है।

उन्होंने कहा कि भारत में हमने डिजिटल उपकरणों का उपयोग सभी के अधिकारों तक पहुंच का विस्तार करने के लिए बड़े पैमाने पर किया है।

इससे न्याय तक पहुंच, नागरिक और राजनीतिक अधिकारों तथा 1.4 अरब भारतीयों की लोकतांत्रिक भागीदारी को भी बढ़ावा मिला है। साथ ही, इससे महिलाओं के सशक्तिकरण में भी मदद मिली है।

जॉर्ज ने कहा कि पिछले महीने दिल्ली में आयोजित एआई इंपैक्ट समिट में 100 से अधिक देशों की मौजूदगी में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की शक्ति को वैश्विक स्तर पर साझा करने के विचार का समर्थन किया गया।

उन्होंने बताया कि इस शिखर सम्मेलन में 20 राष्ट्राध्यक्ष और लगभग 45 मंत्रियों ने हिस्सा लिया। इस सम्मेलन का आयोजन भारत ने फ्रांस के साथ मिलकर किया था।

जॉर्ज के अनुसार, सम्मेलन में यह स्वीकार किया गया कि एआई की वास्तविक शक्ति तभी पूरी तरह सामने आ सकती है जब इसके लाभ पूरी मानवता के बीच समान रूप से साझा किए जाएं, जिसमें ग्लोबल साउथ की भागीदारी भी शामिल हो।

उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर की उस अपील को भी याद किया, जिसमें उन्होंने परिषद से केवल बयान और प्रस्तावों से आगे बढ़कर सबसे कमजोर लोगों के दैनिक जीवन में ठोस सुधार लाने का आह्वान किया था।

जॉर्ज ने कहा, “हम दृढ़ता से मानते हैं कि सभी मानवाधिकारों के प्रति एक समग्र और संतुलित दृष्टिकोण, जो एकीकृत विकास मॉडल पर आधारित हो, उन्हें हासिल करने का सबसे प्रभावी रास्ता है।” उन्होंने कहा कि भारत का डिजिटल कार्यक्रम इसी दृष्टिकोण का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।

उन्होंने परिषद को यह भी याद दिलाया कि आतंकवाद मानवाधिकारों के लिए एक गंभीर खतरा बना हुआ है और इसके खिलाफ संयुक्त कार्रवाई का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, “आतंकवाद मानवाधिकारों के लिए सबसे गंभीर खतरों में से एक है।” हमें इसके सभी रूपों और अभिव्यक्तियों का मुकाबला करने के अपने संकल्प पर अडिग रहना चाहिए। इस मुद्दे पर परिषद को एक स्वर में बोलते रहना चाहिए।
 

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