अरुणाचल में दर्दनाक सड़क हादसा: देशसेवा में दो जवान शहीद, राज्यपाल ने दी श्रद्धांजलि, शोक संतप्त परिवारों को सांत्वना

अरुणाचल के राज्यपाल ने सड़क हादसे में दो सैनिकों की मौत पर जताया शोक


इम्फाल, 11 मार्च। अरुणाचल प्रदेश के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल के.टी. परनाइक (सेवानिवृत्त) ने राज्य के अपर सुबनसिरी जिले में सड़क दुर्घटना में दो सेना के जवानों की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया है।

राज्यपाल ने कहा कि 56 आर्टिलरी ब्रिगेड के तहत 908 फील्ड रेजिमेंट के नायब सूबेदार कुलवंत सिंह और 18 सिख रेजिमेंट के नायक प्रदीप कुमार शर्मा ने देश की सेवा करते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।

लोक भवन की ओर से जारी बयान में कहा गया कि राज्यपाल ने जवानों के साहस, समर्पण और संवेदनशील सीमाओं की रक्षा के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को श्रद्धांजलि अर्पित की।

उन्होंने कहा, “मैं अरुणाचल प्रदेश की जनता और पूरे देश की ओर से शोक संतप्त परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत आत्माओं को शांति प्रदान करें और इस दुख की घड़ी में उनके परिजनों को संबल दें।”

इस बीच, मणिपुर के चंदेल जिले के सेहलों में मुख्यालय महानिरीक्षक असम राइफल्स (दक्षिण) के तत्वावधान में एक श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया। इसमें लांस नायक (स्व.) खिम बहादुर थापा, लांस नायक (स्व.) भोला दत्त छेत्री और लांस नायक (स्व.) पदम बहादुर सुनार के सर्वोच्च बलिदान को श्रद्धांजलि दी गई।

इन वीर सैनिकों ने मार्च 1966 में मिजोरम के आइजोल में हुए उग्रवादी विरोधी अभियानों के दौरान अदम्य साहस और कर्तव्यनिष्ठा का परिचय दिया था। 27 फरवरी 1966 को मिजो नेशनल फ्रंट के उग्रवादियों ने 1 असम राइफल्स के सभी ठिकानों और बटालियन मुख्यालय पर भीषण हमला किया था, जो लगातार 12 दिनों तक जारी रहा।

विपरीत परिस्थितियों के बावजूद इन तीनों सैनिकों ने अदम्य साहस के साथ अपने मोर्चे की रक्षा की। गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद वे डटे रहे और बहादुरी से मुकाबला करते रहे।

लांस नायक खिम बहादुर थापा ने 5 मार्च 1966 को, लांस नायक भोला दत्त छेत्री ने 7 मार्च 1966 को और लांस नायक पदम बहादुर सुनार ने 11 मार्च 1966 को अपने घावों के कारण दम तोड़ दिया। उनका बलिदान वीरता और निस्वार्थ सेवा का अमिट उदाहरण है।

इसके अलावा मणिपुर के चुराचांदपुर जिले के वेंग बटालियन मुख्यालय में भी एक श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया, जिसमें सूबेदार सरवन कुमार के सर्वोच्च बलिदान को नमन किया गया। उन्होंने 10 मार्च 2009 को कांगपोकपी जिले के हाइजांग गांव में उग्रवादियों से लड़ते हुए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए।
 

Similar threads

Latest Replies

Forum statistics

Threads
15,538
Messages
15,575
Members
20
Latest member
7519202689
Back
Top