दिल्ली आबकारी नीति केस में केजरीवाल का नया दांव: जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच से ट्रांसफर की मांग

दिल्ली आबकारी नीति मामले को दूसरी बेंच में ट्रांसफर करने की अरविंद केजरीवाल ने की मांग


नई दिल्ली, 11 मार्च। आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को एक अर्जी दी है, जिसमें उन्होंने दिल्ली आबकारी नीति मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) की पुनर्विचार याचिका को जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच से दूसरी बेंच में ट्रांसफर करने की मांग की है।

अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय को एक पत्र लिखकर दिल्ली आबकारी नीति (एक्साइज पॉलिसी) मामले की सुनवाई किसी दूसरी बेंच को सौंपने की मांग की है।

केजरीवाल ने कहा कि जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच से इस मामले को हटाकर किसी अन्य बेंच को दिया जाए।

यह मामला सीबीआई की उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें उसने ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें इस केस के सभी 23 आरोपियों को बरी कर दिया गया था। इनमें केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया भी शामिल हैं।

हाल ही में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने सीबीआई की याचिका पर केजरीवाल, सिसोदिया और अन्य लोगों को नोटिस जारी किया था। साथ ही हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश पर भी रोक लगा दी, जिसमें मामले की जांच करने वाले सीबीआई अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करने को कहा गया था। अदालत ने कहा कि जांच एजेंसी और अधिकारी के खिलाफ की गई टिप्पणियां फिलहाल स्थगित रहेंगी।

हाईकोर्ट ने संकेत दिया है कि इस मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह हो सकती है।

इसी बीच, ईडी ने भी एक याचिका दायर कर ट्रायल कोर्ट की उन टिप्पणियों को हटाने की मांग की है, जो उसके खिलाफ की गई थीं। ईडी का कहना है कि जब ट्रायल कोर्ट ने यह फैसला दिया था, तब वह उस मामले में पक्षकार नहीं थी और उसे अपनी बात रखने का मौका भी नहीं मिला।

सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने अदालत में कहा कि ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियां ईडी की चल रही जांच को प्रभावित कर सकती हैं, जो प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्डरिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत चल रही है।

वहीं, हाईकोर्ट ने कहा कि ईडी की शिकायत पर भी उसी समय विचार किया जाएगा, जब सीबीआई की याचिका पर सुनवाई होगी, क्योंकि ट्रायल कोर्ट के पूरे फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है।

सीबीआई का कहना है कि ट्रायल कोर्ट का फैसला गलत है और बिना मुकदमे के ही आरोपियों को बरी कर दिया गया। जांच एजेंसी के अनुसार आबकारी नीति में कथित रूप से कुछ निजी शराब कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए बदलाव किए गए थे और इसके बदले रिश्वत ली गई थी।

हालांकि, ट्रायल कोर्ट ने इस आरोप को खारिज करते हुए कहा था कि रिकॉर्ड से पता चलता है कि यह नीति तय प्रक्रिया के तहत चर्चा और सलाह के बाद बनाई गई थी।
 

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