नई दिल्ली, 11 मार्च (आईएएनएस) विदेश में भारतीय छात्रों व नागरिकों की सुरक्षा का विषय बुधवार को राज्यसभा में उठाया गया। यह विषय कांग्रेस सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने सदन के समक्ष उठाया। उन्होंने कहा कि यह एक अहम मसला है इसलिए वह इसे राज्यसभा में उठा रहे हैं। गोहिल का कहना था कि दुनिया में कहीं भी भारतीय नागरिक का उत्पीड़न होता है, दुनिया में कहीं भी भारतीय नागरिक के ऊपर हमला होता है, तो यह एक व्यक्ति के ऊपर नहीं, पूरे देश की इज्जत के ऊपर यह हमला माना जाता है।
कांग्रेस सांसद शक्ति सिंह गोहिल ने कहा कि ऐसी घटनाओं से पूरे देश की इज्जत खराब होती है। 196 देशों में हमारे देश के छात्र पढ़ाई व अभ्यास करने के लिए जाते हैं। अभी कुछ ही दिन पहले रूस में भारतीय छात्रों पर चाकू से हमला हुआ। इस हमले में चार छात्र बुरी तरह से घायल हुए थे। ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट एसोसिएशन ने भी इसके खिलाफ शिकायत दी है। उन्होंने इस घटना को लेकर अपना विरोध भी जताया है।
गोहिल ने कहा कि स्वयं विदेश मंत्रालय के आंकड़े बता रहे हैं कि 2025 में 350 छात्रों के पर किसी न किसी तरह से मुश्किल आई है। उनकी शिकायतें भी विदेश मंत्रालय को मिली है। इन 350 मामलों में से 200 शिकायतें अकेले केवल रूस से प्राप्त हुई हैं। उन्होंने कहा कि ये भी विदेश मंत्रालय के ही आंकडे दिखा रहे हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ये हालत क्यों हो रही है।
उन्होंने कहा कि वह इसके लिए सरकार को भी अनुरोध करना चाहते हैं। केंद्र सरकार ने देश में शिक्षा का इतना निजीकरण कर दिया है कि देश के मुकाबले कई विद्यार्थियों को विदेशों में एमबीबीएस जैसे कोर्स करना ठीक लग रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे देश में पढ़ाई इतनी महंगी है कि यहां के मुकाबले विदेशों में छात्र कम फीस देकर पढ़ाई कर पाते हैं। उन्होंने सरकार से पढ़ाई का खर्च कम करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि हमारे देश के नागरिक चाहे वे किसी भी पार्टी, किसी भी विचारधारा से हो, सरकार को सभी की चिंता करनी चाहिए। अभी पश्चिम एशिया का जो युद्ध चल रहा है, बड़े-बड़े देश अपने नागरिकों के लिए सुविधाएं देने में जुटे हुए हैं। फिलहाल भारत की ओर से ऐसी कोई सुविधा नहीं की जा सकी है। उन्होंने कहा कि एयरलाइंस दुबई या ऐसे किसी अन्य स्थान से लोगों को लेकर आ रहे हैं तो उनसे अधिक किराया लिया जा रहा है। सिर्फ स्वदेश वापसी की टिकट के लिए ये एयरलाइंस लोगों को लूट रही हैं और हम बैठे-बैठे सिर्फ देख रहे हैं।