नई दिल्ली, 11 मार्च। जालंधर बंध (चिन लॉक) योग की एक महत्वपूर्ण तकनीक है। यह खास तौर पर प्राणायाम और ध्यान के दौरान किया जाता है और माना जाता है कि इससे मन को शांत रखने, एकाग्रता बढ़ाने और शरीर के कुछ महत्वपूर्ण अंगों को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिलती है।
कई योग विशेषज्ञ बताते हैं कि इस बंध का नियमित अभ्यास गले के आसपास के हिस्से को सक्रिय करता है, जिससे थायरॉयड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसके साथ ही यह श्वसन प्रणाली को भी संतुलित करने में मदद करता है। हालांकि, किसी भी योग अभ्यास की तरह इसे भी सही तरीके और सावधानी के साथ करना जरूरी होता है।
जालंधर बंध करने का तरीका बहुत जटिल नहीं है, लेकिन शुरुआत में इसे धीरे-धीरे सीखना चाहिए। सबसे पहले आप किसी शांत और साफ जगह पर बैठें। बैठने के लिए आप पद्मासन, वज्रासन या सुखासन में से कोई भी आरामदायक आसन चुन सकते हैं। बैठते समय अपनी पीठ सीधी रखें ताकि शरीर का संतुलन बना रहे। इसके बाद अपने दोनों हाथों को घुटनों पर रखें। अब धीरे-धीरे गहरी सांस लें और सांस को कुछ सेकंड के लिए अंदर रोक लें। इसके बाद अपनी ठोड़ी को धीरे-धीरे नीचे की ओर झुकाएं और कोशिश करें कि वह आपकी छाती या हंसली की हड्डी के पास हल्के से टिक जाए।
जब आप इस स्थिति में हों, तो अपने कंधों को थोड़ा ऊपर उठाकर रखें और कोहनियों को सीधा रखने की कोशिश करें। ध्यान रखें कि गर्दन पर ज्यादा दबाव न पड़े और आप सहज महसूस करें। जितनी देर तक आरामदायक लगे, उतनी देर इस स्थिति में रहें। शुरुआत में कुछ सेकंड ही काफी होते हैं। इसके बाद बंध खोलने के लिए धीरे-धीरे सिर को ऊपर उठाएं, कंधों को ढीला छोड़ दें और सामान्य सांस लेना शुरू कर दें। कुछ समय बाद आप फिर से इस प्रक्रिया को दोहरा सकते हैं। नियमित अभ्यास के साथ आप इसकी अवधि धीरे-धीरे बढ़ा सकते हैं।
योग विशेषज्ञों का मानना है कि जालंधर बंध का नियमित अभ्यास करने से ध्यान लगाने में मदद मिल सकती है, क्योंकि इससे मन भटकने के बजाय एक जगह टिकने लगता है। इसके अलावा गले के आसपास रक्त संचार बेहतर होने से थायरॉयड ग्रंथि को भी लाभ मिल सकता है।