रक्षा मंत्रालय का बड़ा कदम: AoN मंजूरी के बाद वायुसेना के लिए 6 बोइंग 767 एरियल टैंकरों की डील पक्की करने की तैयारी

रक्षा मंत्रालय का बड़ा कदम: AoN मंजूरी के बाद वायुसेना के लिए 6 बोइंग 767 एरियल टैंकरों की डील पक्की करने की तैयारी


भारतीय वायुसेना की ताकत जल्द ही कई गुना बढ़ने वाली है। रक्षा मंत्रालय ने वायुसेना की लंबे समय से चली आ रही मांग को स्वीकार करते हुए 6 बोइंग 767 (Boeing 767) विमानों को खरीदने और उन्हें 'एरियल टैंकर' में बदलने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी को तकनीकी भाषा में 'एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी' (AoN) कहा जाता है।

क्या है यह डील और क्यों है खास?​

इस पूरे प्रोजेक्ट की कीमत लगभग 9,000 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसके तहत सीधे नए विमान खरीदने के बजाय, ग्लोबल मार्केट से पुराने (pre-owned) बोइंग 767 विमानों को खरीदा जाएगा। इसके बाद, उन्हें मोडिफाई करके 'मल्टी-मिशन टैंकर ट्रांसपोर्ट' (MMTT) यानी हवा में ही दूसरे लड़ाकू विमानों में ईंधन भरने वाले टैंकरों में बदला जाएगा।

कौन करेगा यह काम? (IAI और HAL की जुगलबंदी)​

अतिरिक्त जानकारी और सूत्रों के मुताबिक, यह काम इजरायल एयरोस्पेस इंडस्ट्रीज (IAI) और भारत की हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) मिलकर करेंगे।
  • IAI के पास पुराने पैसेंजर विमानों को टैंकर में बदलने का लंबा अनुभव है।
  • HAL इस प्रोजेक्ट में भारतीय पार्टनर के तौर पर शामिल होगा, जिससे 'मेक इन इंडिया' को भी बढ़ावा मिलेगा।
ये नए टैंकर आधुनिक रडार, एवियोनिक्स और रिफ्यूलिंग सिस्टम से लैस होंगे, जो सुखोई-30 MKI और राफेल जैसे फाइटर जेट्स को हवा में ही फ्यूल दे सकेंगे।

वायुसेना को इसकी जरूरत क्यों पड़ी?​

फिलहाल भारतीय वायुसेना के पास 6 रूसी इल्युशिन-78 (Il-78 Midas) टैंकर हैं। ये विमान अब पुराने हो चुके हैं और इनमें आए दिन मेंटेनेंस की दिक्कतें आती रहती हैं। स्पेयर पार्ट्स की कमी और बार-बार खराब होने की वजह से वायुसेना के ऑपरेशन्स पर असर पड़ रहा था। जैसे-जैसे वायुसेना का दायरा बढ़ रहा है और लंबी दूरी के मिशन जरूरी हो गए हैं, वैसे-वैसे नए और भरोसेमंद टैंकरों की कमी खल रही थी।

कब तक मिलेंगे ये विमान?​

सूत्रों का कहना है कि मार्च 2026 तक इस डील पर फाइनल मुहर लग सकती है। एक बार डील साइन होने के बाद:
  1. पुराने विमानों को बाजार से चुना जाएगा।
  2. उनके स्ट्रक्चर में बदलाव और रिफ्यूलिंग सिस्टम लगाया जाएगा।
  3. कड़ी फ्लाइट टेस्टिंग होगी।
उम्मीद है कि 2030 से इन विमानों की डिलीवरी शुरू हो जाएगी। शुरुआत में दो विमान मिलेंगे और उसके बाद हर साल दो विमान वायुसेना के बेड़े में शामिल होंगे।

क्या होगा फायदा?​

बोइंग 767 एक परखा हुआ प्लेटफॉर्म है। ये विमान न सिर्फ ज्यादा फ्यूल ले जा सकते हैं, बल्कि ये लंबे समय तक हवा में टिके रह सकते हैं।

सबसे अच्छी बात यह है कि इनके लिए वायुसेना को अपने मौजूदा रनवे या हैंगर में कोई बड़ा बदलाव नहीं करना पड़ेगा। इनके आने से चीन और पाकिस्तान सीमा पर लंबी दूरी के मिशन और 'डीप स्ट्राइक' (दुश्मन के घर में घुसकर हमला) करने की भारत की क्षमता में जबरदस्त इजाफा होगा।
 

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