पटना, 10 मार्च। बिहार में राज्यसभा चुनाव में छह प्रत्याशियों के मैदान में उतर जाने के बाद मतदान होना तय है। ऐसे में इस चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी बढ़ी हुई है। इस बीच, राजद के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और बिहार विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने मंगलवार को गठबंधन के विधायकों की बैठक बुलाई।
कहा जा रहा है कि इस बैठक के जरिये चुनावी समीकरण साधने की कोशिश की गई। इस बैठक के बाद तेजस्वी यादव ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि बैठक बेहद सकारात्मक रही और सभी सहयोगी दलों के साथ बातचीत जारी है। उन्होंने विश्वास जताया कि आने वाले राज्यसभा चुनाव में हम लोग निश्चिंत हैं कि महागठबंधन का उम्मीदवार जीत हासिल करेगा।
आवश्यक संख्या बल को लेकर पूछे गए एक सवाल पर उन्होंने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “हमारे पास संख्या है, तभी तो चुनाव लड़ रहे हैं।” इधर, बैठक के बाद पूर्व मंत्री और राजद नेता चंद्रशेखर ने कहा कि साम्प्रदायिक पार्टियां और विचार देश के लिए खतरा हैं। उनके खिलाफ सोशल जस्टिस की पार्टियां एक हैं। उन्होंने कहा कि यह मात्र गेट-टू-गेदर था। सभी निश्चिंत हैं कि हमारी जीत तय है। दरअसल, बिहार से राज्यसभा की पांच सीटें इस बार खाली हो रही हैं और इन सीटों पर चुनाव होने जा रहा है।
एनडीए ने राज्यसभा चुनाव में पांच जबकि राजद ने एक प्रत्याशी उतारे हैं। 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में एक उम्मीदवार को जीतने के लिए 41 विधायकों का समर्थन चाहिए। अभी एनडीए के पास कुल 202 विधायक हैं। इसके आधार पर एनडीए आसानी से चार सीटें जीत सकता है। चार सीटें जीतने के बाद भी उसके पास कुछ वोट बचेंगे, लेकिन पांचवीं सीट जीतने के लिए उसे अन्य विधायकों की जरूरत पड़ेगी।
विपक्षी खेमे में राष्ट्रीय जनता दल की अगुवाई वाला महागठबंधन है। महागठबंधन के पास कुल 35 विधायक हैं। इसे एक सीट पर जीत दर्ज करने के लिए अन्य विधायकों की जरूरत पड़ेगी। यही वजह है कि इस चुनाव को लेकर राजनीतिक गणित और जोड़-तोड़ की चर्चा तेज हो गई है।