भारतीय सेना ने अपनी सबसे ताकतवर स्वदेशी तोप, 'एडवांस्ड टोन्ड आर्टिलरी गन सिस्टम' (ATAGS) को एक नया और दमदार नाम दिया है। अब इस स्वदेशी तोप को ‘अमोघ’ (Amogh) के नाम से जाना जाएगा।
15 जनवरी को होने वाली आर्मी डे परेड की रिहर्सल के दौरान इस तोप पर 'अमोघ' लिखा हुआ देखा गया, जिससे यह साफ हो गया है कि सेना ने इसका नामकरण आधिकारिक तौर पर कर दिया है।
‘अमोघ’ का मतलब और इसका महत्व
हिंदी और संस्कृत में 'अमोघ' का अर्थ होता है—अचूक या जो कभी विफल न हो (Infallible)।ATAGS का नाम बदलकर अमोघ रखना केवल एक औपचारिकता नहीं है, बल्कि यह इस हथियार की विश्वसनीयता और युद्ध के मैदान में इसकी सटीकता पर सेना के भरोसे को दिखाता है।
भारतीय सैन्य परंपरा में, किसी हथियार को औपचारिक नाम देना इस बात का संकेत होता है कि वह सिस्टम अब पूरी तरह से तैयार है और सेना के बेड़े में लंबी सेवा के लिए शामिल होने जा रहा है।
दुनिया की सबसे बेहतरीन तोपों में शामिल
रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) और भारतीय निजी इंडस्ट्री द्वारा मिलकर तैयार की गई 'अमोघ' (ATAGS) ने अपने ट्रायल्स के दौरान शानदार प्रदर्शन किया है।इसकी खासियतें इसे दुनिया की सबसे घातक तोपों की श्रेणी में खड़ा करती हैं:
- लॉन्ग रेंज: यह 155mm/52-कैलिबर की तोप है, जिसने फायरिंग ट्रायल्स में 48 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तक सटीक निशाना लगाकर रिकॉर्ड बनाया है।
- हाई-टेक फीचर्स: इसमें ऑटोमैटिक गोला-बारूद लोड करने की क्षमता, आधुनिक फायर कंट्रोल सिस्टम और पूरी तरह से इलेक्ट्रिक ड्राइव सिस्टम लगा है। इससे इसे युद्ध के मैदान में बहुत तेजी से तैनात किया जा सकता है और लगातार गोलाबारी की जा सकती है।
आत्मनिर्भर भारत की बड़ी जीत
आर्मी डे परेड रिहर्सल में 'अमोघ' का दिखना इस बात का सबूत है कि यह प्रोजेक्ट अब विकास के चरण से निकलकर ऑपरेशनल चरण में पहुँच गया है।भारतीय सेना ने इसके लिए बड़े ऑर्डर दिए हैं, जो 'आत्मनिर्भर भारत' पहल के तहत सबसे बड़ी आर्टिलरी खरीद में से एक है। इससे विदेशी सप्लायर्स पर भारत की निर्भरता कम होगी।
इंडस्ट्री के नजरिए से देखें तो, 'अमोघ' का नामकरण भारत की प्राइवेट डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग की क्षमता पर एक मुहर है। यह प्रोजेक्ट दिखा रहा है कि कैसे सरकारी और प्राइवेट सेक्टर मिलकर विश्व स्तरीय हथियार बना सकते हैं।