नई दिल्ली, 10 मार्च। अजमेर शरीफ स्थित दरगाह हजरत ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती से जुड़े सूफी आध्यात्मिक प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को नई दिल्ली में ईरान के सांस्कृतिक केंद्र और दूतावास का दौरा कर ईरान के सर्वोच्च धार्मिक नेता आयतुल्लाह इमाम अली खामेनेई के शहादत पर गहरा शोक व्यक्त किया। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व दरगाह अजमेर शरीफ के गद्दीनशीन और चिश्ती फाउंडेशन के अध्यक्ष हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने किया।
प्रतिनिधिमंडल ने सबसे पहले नई दिल्ली स्थित ईरान कल्चरल हाउस का दौरा किया, जहां उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता के भारत में प्रतिनिधि हुज्जतुल इस्लाम हकीम इलाही से मुलाकात की। इस दौरान शेख जियाई, जो ईरान के दूतावास में सांस्कृतिक काउंसलर और ईरान कल्चरल हाउस के प्रमुख हैं, भी मौजूद रहे। बैठक के दौरान सूफी प्रतिनिधिमंडल ने ईरान के प्रति संवेदना और एकजुटता का संदेश दिया तथा दोनों देशों के बीच आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों पर चर्चा की। इसके बाद, प्रतिनिधिमंडल ने ईरान का दूतावास पहुंचकर भारत में ईरान के उप उच्चायुक्त डॉ. आगा होसैनी से मुलाकात की और आधिकारिक बुक ऑफ कंडोलेंस में शोक संदेश दर्ज किया।
सूफी प्रतिनिधिमंडल में हाजी सैयद सलमान चिश्ती के अलावा सैयद मेराज चिश्ती, सैयद दानिश अली, सैयद नूर चिश्ती, सैयद नदीम चिश्ती, सैयद जावेद कुतबी (दरगाह हजरत कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी), सैयद अनफल निजामी (दरगाह हजरत निजामुद्दीन औलिया), सैयद दानिश नासिरी चिश्ती (दरगाह हजरत नसीरुद्दीन चिराग-ए-दिल्ली) के साथ-साथ सैयद सादिक हुसैनी और सूफी समुदाय के अन्य सदस्य शामिल थे। इस अवसर पर हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने कहा कि भारत और ईरान के बीच सदियों पुराने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंध रहे हैं। इन संबंधों ने दोनों देशों की साझा सभ्यताओं और सूफी परंपराओं को मजबूत किया है।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि निर्दोष नागरिकों के खिलाफ हिंसा और युद्ध अपराधों की कड़ी निंदा की जानी चाहिए। साथ ही वैश्विक नेताओं से न्याय, संयम और शांतिपूर्ण संवाद को बढ़ावा देने की भी अपील की गई। प्रतिनिधिमंडल ने अजमेर शरीफ की पवित्र दरगाह से दिवंगत आत्मा की शांति और ईरान के लोगों के लिए धैर्य, स्थिरता और शांति की दुआ भी की। साथ ही युद्ध और हिंसा से प्रभावित महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए भी विशेष प्रार्थनाएं की गईं।