मिडलाइफ कोई संकट नहीं बल्कि महिला की असली ताकत का उदय है : लिसा रे

मिडलाइफ कोई संकट नहीं बल्कि महिला की असली ताकत का उदय है : लिसा रे


मुंबई, 10 मार्च। फिल्म 'कसूर' से भारतीय सिनेमा में लोकप्रियता हासिल करने वाली कनाडाई-भारतीय अभिनेत्री लिसा रे अब भले ही स्क्रीन पर दिखाई नहीं देती हैं लेकिन वे सोशल मीडिया के जरिए महिलाओं के स्वास्थ्य, उम्र बढ़ने और जीवन के विभिन्न पहलुओं पर खुलकर बात करती रहती हैं।

लिसा रे ने मंगलवार को अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर अपने विचार व्यक्त किए। इस पोस्ट में उन्होंने मिडलाइफ के बारे में अपने भाव व्यक्त किए। अभिनेत्री ने लिखा, "जब शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन कम होने लगता है, तो कई बदलाव आते हैं। लोग अब दूसरों को खुश करने की पुरानी आदत छोड़ देते हैं। खुद पर शक करना कम हो जाता है और मन की शांति सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण लगने लगती है। वहीं, अपनी बनाई गई सीमाएं और नियम मजबूत होने लगते हैं।"

लिसा ने लिखा, "मिडलाइफ वह दौर है जब हार्मोन के बदलाव के साथ-साथ जिंदगी की बेकार चीजें भी दूर हो जाती हैं। अब कम माफी मांगते हैं, कम खुद को साबित करने की कोशिश करते हैं। अपनी कीमत खुद समझ आती है। जरूरत पड़ने पर साफ 'ना' कहना आसान हो जाता है और जीवन ज्यादा सुकून से जीने लगता है।"

अपनी बात को खत्म करते हुए अभिनेत्री ने लिखा कि मिडलाइफ कोई संकट या क्राइसिस नहीं है बल्कि यह वह खास समय है जब महिला अपनी असली ताकत के साथ जीना शुरू करती है। यह जीवन की कहानी का दूसरा हिस्सा होता है, जो आखिरकार पूरी तरह उसका अपना होता है। सच तो यह है कि महिलाओं की जिंदगी का यह सबसे महत्वपूर्ण और शक्तिशाली दौर होता है।"

लिसा रे 90 के दशक की मशहूर अभिनेत्री और मॉडल हैं। उन्होंने साल 1994 में फिल्म 'हंसते खेलते' से हिंदी सिनेमा में कदम रखा था, लेकिन असल पहचान उन्हें फिल्म कसूर से मिली थी। इसके बाद वे ‘वाटर’ और ‘आई कांट थिंक स्ट्रेट’ जैसी फिल्मों में नजर आई थीं। हालांकि, करियर के पीक पर ही उन्हें कैंसर हो गया था और उन्होंने फिल्मों से ब्रेक ले लिया था। हालांकि अब वह ठीक हैं और उन्होंने कैंसर से जंग जीत ली है।
 

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