गुजरात के उप मुख्यमंत्री ने हरियाणा के मुख्यमंत्री सैनी से की मुलाकात, राज्यसभा चुनाव पर की चर्चा

गुजरात के उप मुख्यमंत्री ने हरियाणा के मुख्यमंत्री सैनी से की मुलाकात, राज्यसभा चुनाव पर की चर्चा


चंडीगढ़/गांधीनगर, 10 मार्च। गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने मंगलवार को हरियाणा दौरे के दौरान रोहतक में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेताओं के साथ आगामी राज्यसभा चुनावों से पहले संगठनात्मक तैयारियों पर चर्चा की।

गुजरात के उप मुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हरियाणा के दौरे और रोहतक में भाजपा के राज्य कार्यालय में कई पार्टी नेताओं से मुलाकात की फोटो साझा की है।

इस बैठक में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, राज्य भाजपा अध्यक्ष मोहन लाल बडोली, वरिष्ठ पार्टी नेता और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ ही राज्य सरकार के मंत्री व पार्टी पदाधिकारी भी उपस्थित थे।

संघवी के अनुसार, चर्चा आगामी राज्यसभा चुनावों से संबंधित संगठनात्मक मामलों पर केंद्रित थी। पार्टी नेताओं ने बताया, "बैठक में पार्टी के भीतर समन्वय और चुनाव प्रक्रिया के लिए आवश्यक तैयारियों की समीक्षा की गई। इस बैठक ने नेताओं को चुनाव से संबंधित रणनीति का आदान-प्रदान करने का अवसर भी प्रदान किया।"

यह दौरा भाजपा की ओर से हरियाणा में राज्यसभा चुनावों के लिए हर्ष संघवी को पार्टी के केंद्रीय पर्यवेक्षक के रूप में नियुक्त करने के कुछ ही समय बाद हुआ है।

सांघवी की नियुक्ति के साथ-साथ, भाजपा ने उन अन्य राज्यों के लिए भी पर्यवेक्षकों के नाम घोषित किए हैं जहां राज्यसभा चुनाव होने वाले हैं।

छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा और केंद्रीय मंत्री हर्ष मल्होत्रा को बिहार के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त किया गया है। ओडिशा में महाराष्ट्र सरकार के मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को यही जिम्मेदारी सौंपी गई है।

इस व्यवस्था के तहत, पर्यवेक्षकों को संबंधित राज्य में चुनाव प्रक्रिया से जुड़े समन्वय और संगठनात्मक कार्यों की देखरेख का जिम्मा सौंपा जाता है।

चुनाव आयोग ने राज्यसभा के द्विवार्षिक चुनावों का कार्यक्रम 16 मार्च को निर्धारित किया है, जिसमें कई राज्यों में मतदान होगा जहां सदस्यों का कार्यकाल अप्रैल में समाप्त होने वाला है।

इन चुनावों के माध्यम से बिहार, हरियाणा, ओडिशा, असम और अन्य राज्यों से उच्च सदन के नए प्रतिनिधियों का चयन होगा, जिसमें संबंधित राज्य विधानसभाओं के विधायक सदस्यों को चुनने के लिए मतदान करेंगे।

भाजपा की ओर से पर्यवेक्षकों की नियुक्ति चुनावों से पहले की संगठनात्मक तैयारियों का हिस्सा है, जिसके तहत राज्यसभा में कई रिक्तियों को भरा जाएगा क्योंकि मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल अगले महीने समाप्त हो रहा है।
 

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