बेलगावी, 10 मार्च। कर्नाटक के बेलगावी शहर में साइबर अपराध तेजी से बढ़ती चुनौती बनते जा रहे हैं। इसको लेकर बेलगावी सिटी पुलिस विशेष अभियान चला रही है और आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। इसी कड़ी में पुलिस कमिश्नर भूषण बोरासे ने लोगों को सतर्क रहने की अपील की है।
उनका कहना है कि साइबर क्राइम अब सिर्फ बेलगावी या कर्नाटक तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरे देश और दुनिया के लिए बड़ी समस्या बन चुका है। इन अपराधों में सबसे ज्यादा इस्तेमाल म्यूल अकाउंट यानी फर्जी या दूसरे लोगों के नाम से चलाए जा रहे बैंक खातों का किया जाता है।
कमिश्नर भूषण बोरासे के अनुसार, कई बार साइबर अपराधी लोगों को पैसे देकर उनके बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं। वहीं कई मामलों में अपराधी लोगों को वर्क फ्रॉम होम या किसी ऑनलाइन जॉब का लालच देते हैं और उनसे उनके बैंक खाते की जानकारी या एक्सेस ले लेते हैं। इसके बाद इन्हीं खातों का इस्तेमाल ठगी से आए पैसों को इधर-उधर ट्रांसफर करने के लिए किया जाता है। कई लोग बिना पूरी जानकारी के ऐसे जाल में फंस जाते हैं और बाद में उन्हें कानूनी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि केवल बेलगावी शहर में ही इस समय करीब 2,992 म्यूल अकाउंट सक्रिय पाए गए हैं। इनमें से 772 खाते ऐसे हैं जिन्हें फर्स्ट लेयर अकाउंट कहा जाता है। इसका मतलब यह है कि जब किसी पीड़ित के खाते से पैसा ठगी के जरिए निकाला जाता है, तो सबसे पहले वह इसी फर्स्ट लेयर अकाउंट में पहुंचता है। इसके बाद उस पैसे को अलग-अलग कई अन्य खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है, जिससे अपराधियों तक पहुंचना और मुश्किल हो जाता है।
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि इन मामलों को लेकर पूरे कर्नाटक में एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत सभी संदिग्ध म्यूल अकाउंट की जांच की जा रही है। बेलगावी शहर में फिलहाल ऐसे खातों से जुड़े चार मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन खातों को खोलने वाले लोग कौन हैं, उनका बैकग्राउंड क्या है और वे खुद ठगी के शिकार हैं या फिर साइबर अपराधियों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। जांच पूरी होने के बाद मामले में चार्जशीट दाखिल की जाएगी।
भुषण बोरेसे ने आम लोगों से अपील की है कि इंटरनेट पर मिलने वाले किसी भी वर्क फ्रॉम होम या जल्दी पैसे कमाने वाले ऑफर पर आंख बंद करके भरोसा न करें। किसी भी कंपनी या स्कीम की पूरी जानकारी और उसकी विश्वसनीयता जांचने के बाद ही उसमें शामिल हों। अगर किसी स्कीम को लेकर जरा भी शक हो, तो तुरंत साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन से संपर्क करें।