नई दिल्ली, 9 मार्च। प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जनमन) जनजातीय मामलों के मंत्रालय द्वारा 2024 से लागू किया गया। इसका उद्देश्य विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों की सामाजिक और आर्थिक स्थिति को सुधारना है।
इसके तहत उन्हें सुरक्षित आवास, स्वच्छ पेयजल, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य और पोषण, सड़क व टेलीफोन कनेक्टिविटी, बिना बिजली वाले घरों में बिजली और स्थायी रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जाते हैं। यह योजना 9 प्रमुख मंत्रालयों और उनके 11 महत्वपूर्ण हस्तक्षेपों पर केंद्रित है।
कौशल और उद्यमिता विकास का प्रमुख कार्य कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के माध्यम से वन धन विकास केंद्रों में किया जा रहा है। मंत्रालय अपने स्वायत्त संस्थानों नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर एंटरप्रेन्योरशिप एंड स्मॉल बिजनेस डेवलपमेंट और इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ एंटरप्रेन्योरशिप के माध्यम से इस योजना का कौशल और उद्यमिता घटक लागू कर रहा है। इस काम में ट्राइबल कोआपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया का सहयोग लिया जा रहा है।
योजना के तहत 15 राज्यों में कुल 500 वीडीवीके 31 मार्च तक संचालित किए जाने हैं, जिनमें 41,913 वीडीवीके सदस्य शामिल होंगे। इस कार्यक्रम के तहत नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर एंटरप्रेन्योरशिप एंड स्मॉल बिजनेस डेवलपमेंट और आईआईई ने ट्राइबल कोआपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
ट्राइबल कोआपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया का काम राज्य कार्यान्वयन एजेंसियों के साथ मिलकर वीडीवीकेस के निर्माण और संचालन को सुनिश्चित करना और उपकरण/सामग्री उपलब्ध कराना है। नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर एंटरप्रेन्योरशिप एंड स्मॉल बिजनेस डेवलपमेंट और आईआईई की जिम्मेदारी है कि वे वीडीवीकेस में कौशल और उद्यमिता प्रशिक्षण प्रदान करें।
28 फरवरी 2026 तक, कुल 38,391 वीडीवीके सदस्य को उद्यमिता विकास कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित किया जा चुका है और 489 वीडीवीकेस पहले ही चालू हो चुके हैं।
यह जानकारी कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयंत चौधरी ने सोमवार को लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।