वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस से देश में स्थानीय स्तर पर इकोसिस्टम विकसित करने में मिलेगी मदद: इंडस्ट्री

वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस से देश में स्थानीय स्तर पर इकोसिस्टम विकसित करने में मिलेगी मदद: इंडस्ट्री


राजकोट, 12 जनवरी। वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस जैसे समिट देश में स्थानीय स्तर पर इकोसिस्टम विकसित करने में मदद करते हैं। साथ ही, इससे एमएसएमई के विजन को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। यह बयान कारोबारियों की ओर से सोमवार को दिया गया।

समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए ज्योति सीएनसी ऑटोमेशन लिमिटेड के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर पराक्रम सिंह जडेजा ने कहा कि वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस जैसे समिट देश में स्थानीय स्तर पर इकोसिस्टम विकसित करने में मदद करते हैं। साथ ही इससे एमएसएमई के विजन को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी। विकसित भारत विजन के तहत अर्थव्यवस्था को 30 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाना है, जिसमें गुजरात की हिस्सेदारी का लक्ष्य 3 ट्रिलियन डॉलर रखा गया है। ऐसे में इस तरह के इवेंट काफी आवश्यक हैं।

रेस्पियन एंटरप्राइज की एमडी प्रीति पटेल ने कहा कि वाइब्रेंट गुजरात पूरी इंडस्ट्री के लिए एक अच्छा इवेंट है। इससे सरकार के साथ जुड़ने और नीतियों को समझने का मौका मिलता है। हमने यहां अपनी कंपनी के लिए एमओयू साइन किया है। हम अपनी कंपनी में उत्पादन शुरू करने के एडवांस स्टेज में है। डिजाइन आदि को मंजूरी मिल गई है। हमारी फैक्ट्री छोटे रक्षा उपकरणों का निर्माण करेगी।

वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस के साइडलाइन में समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए रक्षा मंत्रालय में रक्षा उत्पादन विभाग के सचिव संजीव कुमार ने कहा कि राजकोट और पूरे गुजरात के कारोबारी इस कॉन्फ्रेंस में आए हुए हैं। यहां पर रक्षा क्षेत्र में अगले 10 वर्षों में आने वाले अवसरों को लेकर काफी अच्छी चर्चा हुई। इसमें कई सवाल निकलकर आए हैं और यह तय किया गया है कि आगामी कुछ महीनों में गुजरात सरकार और रक्षा मंत्रालय और व्यापारियों के संगठनों का एक और चर्चा सत्र रखा जाएगा।

उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का लक्ष्य है कि देश में उपयोग होने वाली हर चीज स्थानीय स्तर पर बने और हमारा देश यह करने में पूरी तरह से सक्षम है।

गुजरात के विज्ञान और तकनीकी मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि वाइब्रेंट गुजरात रीजनल कॉन्फ्रेंस में 5,000 से ज्यादा एमओयू साइन हुए हैं और इसमें 5,78,000 करोड़ रुपए का निवेश की प्रतिबद्धता आई है। इसमें सभी क्षेत्रों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया है।

उन्होंने आगे कहा कि इस क्षेत्र में काफी अधिक क्षमता है। गुजरात की दो-तिहाई समुद्री सीमा इस क्षेत्र में है। राज्य की आधे से ज्यादा जमीन इस क्षेत्र में है। आने वाला दशक भारत का होगा।
 
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