गयाजी, 9 मार्च। बिहार के गयाजी में पिंडदान और पितृपक्ष से जुड़ी धार्मिक तथा सांस्कृतिक परंपराओं की पवित्रता और सांस्कृतिक महत्व को अक्षुण्ण रखते हुए विष्णुपद कॉरिडोर विकसित किया जाएगा।
विश्वभर में मोक्ष स्थली के रूप में चर्चित बिहार के गयाजी में प्रस्तावित विष्णुपद कॉरिडोर के विकास एवं सौंदर्यीकरण को लेकर सोमवार को जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।
बैठक में सरकारी अधिकारियों के अलावा टाउन प्लानर, आर्किटेक्ट, पंडा-पुरोहित, संवाद सदन समिति के सदस्य, सामाजिक कार्यकर्ता तथा विभिन्न वार्ड पार्षदों सहित कई प्रमुख हितधारक उपस्थित रहे।
बैठक में पिछले बैठक में लिए गए निर्णयों की समीक्षा करते हुए यह तय किया गया कि मंदिर के गर्भगृह के चारों ओर स्थित 16 वेदियों (वेदियों) को यथावत रखा जाएगा। साथ ही, मंदिर परिसर की वर्तमान सीमा को आवश्यकता अनुसार विस्तारित करने के प्रस्ताव पर भी विचार किया गया।
बैठक में यह भी स्पष्ट किया गया कि पिंडदान की परंपरागत व्यवस्था को बरकरार रखते हुए यह अनुष्ठान फल्गु नदी के तट पर ही कराया जाएगा, जैसा कि सदियों से होता आया है। इसके अतिरिक्त, श्मशान घाट के लिए उपलब्ध स्थान को भी विस्तारित करने की संभावना पर चर्चा हुई।
मंदिर परिसर के निकट स्थित शिजुआर धर्मशाला को एक विरासत संरचना के रूप में संरक्षित रखने का प्रस्ताव रखा गया। इसी प्रकार मंदिर क्षेत्र के आसपास स्थित अन्य ऐतिहासिक भवनों की पहचान कर उन्हें भी विरासत संरचना के रूप में संरक्षित करने की दिशा में कार्य करने का सुझाव दिया गया।
बैठक में सीताकुंड, मंगलागौरी और अक्षयवट को भी विष्णुपद कॉरिडोर परियोजना के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में विकसित करने पर भी सहमति बनी। जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने बताया, "सभी संबंधित पक्षों के सुझाव लिए गए हैं। विष्णुपद कॉरिडोर परियोजना का उद्देश्य गया की धार्मिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान और तीर्थयात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए एक विश्वस्तरीय तीर्थ क्षेत्र का विकास करना है।"