भारतीय वायु सेना (IAF) की ताकत में जल्द ही एक और बड़ा इजाफा होने वाला है। उम्मीद जताई जा रही है कि दुनिया के सबसे बेहतरीन एयर डिफेंस सिस्टम माने जाने वाले S-400 Triumf की चौथी स्क्वाड्रन मई 2026 के अंत तक भारत पहुँच जाएगी।
रूसी अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यूक्रेन युद्ध के कारण हथियारों की सप्लाई में जो दिक्कतें आ रही थीं, उन्हें अब सुलझा लिया गया है। रूस ने अपनी प्रोडक्शन क्षमता बढ़ा दी है और भारत जैसे अपने खास साथियों को प्राथमिकता दे रहा है।
40,000 करोड़ की डील और सप्लाई में सुधार
भारत और रूस के बीच अक्टूबर 2018 में S-400 की पाँच रेजिमेंट्स (स्क्वाड्रन्स) के लिए करीब 5.43 बिलियन डॉलर (लगभग 40,000 करोड़ रुपये) का समझौता हुआ था।बीच में रूस के डिफेंस इंडस्ट्रियल बेस पर दबाव के कारण डिलीवरी में थोड़ी देरी हुई, लेकिन 2025 के अंत में रूस ने अपने कामकाज की गति बढ़ा दी।
अब मॉस्को ने भरोसा दिया है कि उनका लॉजिस्टिक्स सिस्टम स्थिर है और डिलीवरी समय पर होगी।
देश की सुरक्षा होगी और मजबूत
भारत पहले ही S-400 की तीन स्क्वाड्रन को अपनी पश्चिमी (पाकिस्तान) और उत्तरी (चीन) सीमाओं पर तैनात कर चुका है।ये सिस्टम दुश्मन के किसी भी हवाई हमले को रोकने के लिए एक मजबूत दीवार की तरह काम कर रहे हैं।
चौथी स्क्वाड्रन के आने से यह सुरक्षा घेरा और भी सख्त हो जाएगा। इसका इस्तेमाल विशेष रूप से उन इलाकों में किया जाएगा जहाँ दुश्मन की गहरी पैठ या लगातार जासूसी का खतरा बना रहता है।
'ऑपरेशन सिन्दूर' में दिखाई थी ताकत
मई 2025 में पाकिस्तान के साथ हुए तनाव, जिसे 'ऑपरेशन सिन्दूर' का नाम दिया गया था, के दौरान S-400 ने अपनी काबिलियत साबित की थी।- नो-फ्लाई ज़ोन: इस सिस्टम ने दुश्मन के लिए एक सख्त 'नो-फ्लाई ज़ोन' बना दिया था।
- बड़ी सफलता: डिफेंस सूत्रों के मुताबिक, भारतीय बैटरी ने 314 किलोमीटर की दूरी पर पाकिस्तान के एक बेहद कीमती हवाई जहाज (High-value asset) को मार गिराया था।
- JF-17 का शिकार: एक अन्य घटना में, इस सिस्टम ने अपनी 40N6E मिसाइल का इस्तेमाल करते हुए करीब 200 किलोमीटर दूर एक पाकिस्तानी JF-17 'Thunder' फाइटर जेट को नष्ट कर दिया था।
मिसाइलों का स्टॉक और भविष्य की तैयारी
'ऑपरेशन सिन्दूर' में इस्तेमाल हुई मिसाइलों की भरपाई के लिए भारत अब रूस से करीब 280 नई इंटरसेप्टर मिसाइलों की खरीद पर भी बात कर रहा है।इसके अलावा:
- पाँचवीं स्क्वाड्रन: S-400 की आखिरी और पाँचवीं स्क्वाड्रन 2026 के अंत तक आने की उम्मीद है।
- मरम्मत केंद्र (MRO): भारत और रूस मिलकर भारत में ही एक मेंटेनेंस और रिपेयर फैसिलिटी (MRO) बनाने की योजना बना रहे हैं। इससे सिस्टम की देखरेख सस्ती और आसान हो जाएगी।
- देसी 'प्रोजेक्ट कुशा': जहाँ एक तरफ रूसी सिस्टम तैनात हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ भारत का DRDO अपने स्वदेशी 'प्रोजेक्ट कुशा' (Project Kusha) पर काम कर रहा है। यह भी S-400 की टक्कर का एक लंबी दूरी का एयर डिफेंस सिस्टम होगा, जो इस दशक के अंत तक सेवा में आ सकता है।
S-400 स्क्वाड्रन में क्या होता है?
एक आम S-400 स्क्वाड्रन में कई तरह की गाड़ियाँ और रडार शामिल होते हैं:- कमांड सेंटर (55K6E): जो पूरे युद्ध का प्रबंधन करता है।
- बिग बर्ड रडार (91N6E): यह 600 किलोमीटर दूर तक 300 लक्ष्यों को एक साथ ट्रैक कर सकता है।
- फायर कंट्रोल रडार (92N6E): जो मिसाइल को सटीक निशाना लगाने में मदद करता है।
- लॉन्चर्स (TELs): ट्रक पर लदे मिसाइल लॉन्चर जो अलग-अलग तरह की मिसाइलें दाग सकते हैं।