सनसनीखेज खुलासा! पाकिस्तानी सेना ने 7 बलूचों को गैर-कानूनी हिरासत में मार डाला, मानवाधिकार संगठन का आरोप

Balochistan killing


क्वेटा, 9 मार्च। पाकिस्तानी सेना की बलूचों पर ज्यादती का एक और मामला सामने आया है। यहां करीब सात बलूच नागरिकों को बिना किसी अदालती आदेश के कत्ल किए जाने का आरोप बड़े मानवाधिकार संगठन ने लगाया है।

बलूच नेशनल मूवमेंट के मानवाधिकार विभाग, पांक ने अवारन जिले के दो भाइयों, नादिल बलूच और शेर जान, की बिना कानूनी कार्रवाई के हत्याओं की कड़ी निंदा की। आरोप है कि पाकिस्तानी सिक्योरिटी फोर्स ने उन्हें जबरदस्ती गायब कर दिया था।

राइट्स बॉडी ने बताया कि नादिल का गोलियों से छलनी शव 8 मार्च को अवारन में जाहू के कोटू इलाके में फेंक दिया गया था। आरोप है कि हत्या से लगभग चार महीने पहले तक उसे "गैर-कानूनी हिरासत" में रखा गया था।

उसी दिन, शेर का क्षत-विक्षप्त शव बाद में अवारन के तीरतागे इलाके में मिला। उसे 21 नवंबर, 2025 को पाकिस्तानी लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों ने हब चौकी मेन बाजार से जबरदस्ती गायब कर दिया था।

गहरी चिंता जताते हुए, पांक ने कहा कि "इन दोनों भाइयों की हत्या बलूचिस्तान में आम तौर पर बताई जाने वाली किल एंड डंप पॉलिसी को दर्शाती है, जहां लोगों को जबरदस्ती गायब कर दिया जाता है, फिर लंबे समय तक गैर-कानूनी हिरासत में रखने के बाद उन्हें मृत पाया जाता है।"

पांक ने आगे बताया कि 5 मार्च को पंजगुर जिले के परूम इलाके में डेथ स्क्वाड ने दो युवा ड्राइवरों को निशाना बनाकर मार डाला।

मरने वालों की पहचान 20 साल के नियाज बलूच और 20 साल के जाकिर बलूच के तौर पर हुई।

इस मानवाधिकार संस्था ने नियाज और जाकिर की हत्याओं की एक स्वतंत्र और पारदर्शी जांच की मांग की, साथ ही जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही भी डिमांड की।

पांक ने आगे बताया कि हलीम बलूच का क्षत-विक्षप्त शव 6 मार्च को पंजगुर के सरीकुरान इलाके में जबरदस्ती गायब किए जाने के बाद मिली थी।

मानवाधिकार संस्था के मुताबिक, पंजगुर के खुदाबदन में रहने वाले और अपनी दुकान चलाने वाले हलीम को 20 फरवरी को डेथ स्क्वॉड ने उनके घर से जबरदस्ती गायब कर दिया था।

इस बीच, मानवाधिकार संस्था बलूच यकजेहती कमेटी (बीवाईसी) ने बताया कि हम्माल हसनी, जो एक वकील थे, को पाकिस्तान के फ्रंटियर कॉर्प्स के लोगों ने 6 मार्च को पंजगुर जिले के कोह सब्ज पलंतक इलाके में मार डाला था।

बीवाईसी ने कहा, "हम्माल हसनी की हत्या एक ऐसे पैटर्न पर हुई है जिसे मानवाधिकार रक्षक दो दशकों से ज्यादा समय से डॉक्यूमेंट कर रहे हैं। एक बलूच नागरिक को पकड़ लिया जाता है, किसी दूर के इलाके, घर या चेकपॉइंट पर ले जाया जाता है, और उसे मरा हुआ उसके परिवार को लौटा दिया जाता है, और अधिकारी या तो उसे नकली एनकाउंटर में मारा गया मिलिटेंट बता देते हैं या कोई सफाई नहीं देते।"

पंजगुर में एक अलग घटना में, एक और ड्राइवर, 19 साल के उमर जान को 5 मार्च को परूम इलाके में पाकिस्तान की मदद से चल रहे डेथ स्क्वॉड ने गोली मार दी थी।

उमर की बेरहमी से हत्या की निंदा करते हुए, बीवाईसी ने कहा, "पिछले साल, ये हत्याएं बढ़ीं और बिना किसी नतीजे के जारी रहीं। ह्यूमन राइट्स ऑर्गनाइजेशन को पाकिस्तानी सरकार से बलूचिस्तान के मौजूदा हालात के बारे में पूछना चाहिए। हर किसी की जिंदगी मायने रखती है। बलूचिस्तान को इंसाफ मिलना चाहिए। तुरंत दखल के बिना, जवान और बेगुनाह लोगों की हत्याएं जारी रहेंगी, और दुनिया इंसानियत के बजाय चुप्पी चुन लेगी।"
 

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