मकर संक्रांति पर उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक इन पवित्र स्थलों पर स्नान करने का विशेष महत्व

मकर संक्रांति पर उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक इन पवित्र स्थलों पर स्नान करने का विशेष महत्व


नई दिल्ली, 12 जनवरी। 14 जनवरी को देश के अलग-अलग हिस्सों में अपनी परंपरा के अनुसार मकर संक्रांति का त्योहार मनाया जाएगा। उत्तर भारत में जहां मकर संक्रांति 1 दिन की होती है, वहीं दक्षिण भारत में पोंगल (मकर संक्रांति) को चार दिनों तक सेलिब्रेट किया जाता है।

राज्यों की सीमाओं के साथ त्योहार का नाम भले ही अलग हो, लेकिन उसे मनाने का तरीका लगभग एक जैसा है। मकर संक्रांति में स्नान का विशेष महत्व होता है। माना जाता है कि मकर संक्रांति के दिन स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है।

उत्तर भारत में मकर संक्रांति के दिन हरिद्वार और ऋषिकेश में गंगा नदी में स्नान करने का विशेष महत्व है। इस दिन हरिद्वार में 'हर की पौड़ी' पर श्रद्धालुओं का जन सैलाब उमड़ता है और पितृ पक्ष को प्रसन्न करने के लिए विशेष दान किया जाता है। वहीं ऋषिकेश में भी मां गंगा ही पापों से मुक्ति दिलाने में मदद करती है।

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और वाराणसी में भी स्नान करने से विशेष लाभ मिलता है। माना जाता है कि मकर संक्रांति को गंगा नदी में स्नान कर सारे पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं। संगम को बेहद पवित्र स्थल माना गया है, क्योंकि संगम में स्नान से एक नहीं, बल्कि तीन पवित्र नदियों का आशीर्वाद मिलता है। हर साल मकर संक्रांति पर लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

मकर संक्रांति के दिन दक्षिण भारत में कावेरी और गोदावरी नदी के पवित्र स्थानों पर स्नान करने की परंपरा चली आई है। तमिलनाडु, असम और केरल में पवित्र जलाशयों और कावेरी नदी में स्नान करना शुभ माना जाता है। इसके साथ ही स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य देना शुभ होता है। वहीं नासिक में गोदावरी नदी में भक्त आस्था की डुबकी लगाते हैं।

पश्चिम बंगाल में मकर संक्रांति के दिन गंगासागर में भक्तों का जन सैलाब उमड़ पड़ता है। कहा जाता है "सब तीरथ बार-बार, गंगासागर एक बार।" यहां मकर संक्रांति के मौके पर देश का सबसे बड़ा मेला भी लगता है।

राजस्थान और मध्यप्रदेश में भी मकर संक्रांति के दिन स्नान और सूर्य उपासना का महत्व होता है। राजस्थान में पुष्कर झील और गलता जी में भक्त पवित्र स्नान करते हैं, जबकि मध्य प्रदेश में उज्जैन और जबलपुर में शिप्रा नदी और नर्मदा नदी में स्नान का विशेष महत्व होता है। भक्त लाखों की संख्या में घाटों पर पहुंचते हैं।
 
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