चंडीगढ़, 8 मार्च। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने रविवार को सिरसा जिले में स्थित नामधारी गुरुद्वारे में आयोजित भव्य होला मोहल्ला समारोह में भाग लिया और संत समाज से आशीर्वाद लिया।
समारोह में बड़ी संख्या में मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए नायब सिंह सैनी ने कहा कि इस पवित्र आश्रम में मनाए जा रहे गौरवशाली होला मोहल्ला पर्व के अवसर पर यहां आकर उन्हें बेहद खुशी हो रही है।
मुख्यमंत्री ने संत दिलीप सिंह महाराज के चरणों में नमन करते हुए कहा कि संत समाज प्रेम, सेवा, भाईचारे और आध्यात्मिकता के माध्यम से समाज को जोड़ने का महान कार्य कर रहा है।
उन्होंने कहा कि सिरसा की पवित्र भूमि लंबे समय से संतों और महान विभूतियों की तपोभूमि रही है। वर्ष 1507 में प्रथम सिख गुरु गुरु नानक ने इस भूमि पर कदम रखा था। उनके संदेश को आगे बढ़ाने के लिए यहां गुरद्वारा श्री चिल्ला साहिब की स्थापना की गई।
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस भूमि से बाबा सरसाई नाथ और बाबा भूमन शाह जैसे कई संतों ने आध्यात्मिकता, सेवा और मानवता का संदेश फैलाया। उनके उपदेश आज भी समाज को सही दिशा दिखा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि होला मोहल्ला केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह भारत की समृद्ध संस्कृति, वीरता और आध्यात्मिक परंपरा का जीवंत प्रतीक है। यह लोगों को जीवन में साहस और भक्ति के बीच संतुलन बनाए रखने की प्रेरणा देता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पर्व केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि अन्याय के खिलाफ खड़े होने और धर्म की रक्षा करने का संकल्प भी दर्शाता है। उन्होंने बताया कि गुरु गोबिंद सिंह जी ने खालसा परंपराओं को मजबूत करने और समाज में भाईचारा व एकता को बढ़ावा देने के लिए होली के उत्साह के साथ होला मोहल्ला मनाने की परंपरा शुरू की थी।
उन्होंने कहा कि नामधारी समुदाय का इतिहास त्याग, तपस्या और समर्पण से भरा हुआ है। सतगुरु राम सिंह महाराज द्वारा शुरू किया गया कूका आंदोलन भारत के स्वतंत्रता संग्राम का एक महत्वपूर्ण अध्याय है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि जब देश अंग्रेजों के शासन में था, तब नामधारी समुदाय ने स्वदेशी अपनाने और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार का संदेश दिया, जिससे स्वतंत्रता आंदोलन को नई ऊर्जा मिली।
उन्होंने मलेरकोटला में तोपों के सामने डटकर खड़े होने वाले नामधारी शहीदों को भी श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि इन वीरों ने मुस्कुराते हुए अपने प्राणों की आहुति दी, लेकिन सत्य और आत्मसम्मान का रास्ता कभी नहीं छोड़ा।