वसई, 8 मार्च। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर देश-दुनिया में महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण को लेकर तमाम कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी बीच, महाराष्ट्र के वसई से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। वसई पूर्व के वसंतनगरी सिग्नल इलाके में करीब 15 से 20 दिन की एक नवजात बच्ची को बैग में डालकर सड़क किनारे छोड़ दिया गया। हालांकि, समय रहते पुलिस की तत्परता और एक महिला पुलिसकर्मी की सतर्कता से बच्ची की जान बचा ली गई।
जानकारी के अनुसार, मानिकपुर पुलिस स्टेशन में तैनात महिला पुलिस सिपाही पल्लवी संजय नरवाडे 7 मार्च की रात 9 बजे से 8 मार्च की सुबह 9 बजे तक सीसीटीएनएस ड्यूटी पर थीं। इसी दौरान 8 मार्च की सुबह करीब 7:50 बजे ड्यूटी अधिकारी सागर साबले ने उन्हें सूचना दी कि वसई पूर्व के वसंतनगरी सिग्नल के पास एक बैग में नवजात शिशु मिला है और तुरंत मौके पर पहुंचकर सहायता करने के निर्देश दिए। सूचना मिलते ही पल्लवी नरवाडे एक अन्य पुलिसकर्मी के साथ डायल-112 के सरकारी वाहन से घटनास्थल पर पहुंचीं। वहां पहुंचने पर देखा गया कि बड़ी संख्या में स्थानीय लोग मौके पर जमा थे। जांच के दौरान पता चला कि 'हरा पत्ता वॉशिंग पाउडर' लिखे हरे-सफेद-लाल रंग के बैग में एक नवजात बच्ची रखी हुई थी, जिसे वहां मौजूद महिलाओं ने बैग से बाहर निकाला था।
पुलिस ने मौके पर मौजूद लोगों से बच्ची के बारे में पूछताछ की, लेकिन किसी को भी उसके माता-पिता या उसे वहां छोड़ने वाले व्यक्ति के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। इसके बाद पुलिस ने बिना देर किए बच्ची को तुरंत इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। डॉक्टरों द्वारा की गई प्राथमिक जांच में बच्ची की स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत बच्ची को बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि उसके संरक्षण और देखभाल की उचित व्यवस्था की जा सके।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने बच्ची की देखभाल की जिम्मेदारी होने के बावजूद उसे जानबूझकर खुले स्थान पर छोड़ दिया, जो कि एक गंभीर अपराध है। इस संबंध में माणिकपुर पुलिस स्टेशन में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस आसपास के इलाके के सीसीटीवी फुटेज और अन्य सुरागों के आधार पर जांच कर रही है। महिला दिवस जैसे महत्वपूर्ण दिन पर सामने आई इस घटना ने समाज के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आज भी कहीं-न-कहीं बेटियों के प्रति भेदभाव और संवेदनहीनता मौजूद है। हालांकि पुलिस की तत्परता और महिला पुलिसकर्मी की सतर्कता के कारण इस मासूम बच्ची की जान बच गई, जिससे एक बड़ी अनहोनी टल गई।