पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति मुर्मु के 'अपमान' पर AIADMK-AMMK का फूटा गुस्सा, बोले- संवैधानिक पद को दुख पहुंचाना अक्षम्य

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति मुर्मु के ‘अपमान’ पर एआईएडीएमके और एएमएमके नेताओं की तीखी प्रतिक्रिया


चेन्नई, 8 मार्च। पश्चिम बंगाल सरकार के एक आधिकारिक कार्यक्रम में कथित प्रोटोकॉल उल्लंघन को लेकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु द्वारा निराशा जताए जाने के बाद तमिलनाडु के राजनीतिक नेताओं की तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

एआईएडीएमके और एएमएमके के नेताओं ने इस घटना को प्रोटोकॉल का उल्लंघन और देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद की गरिमा के खिलाफ बताया।

एआईएडीएमके के महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने कहा कि राष्ट्रपति के प्रति किसी भी तरह का अनादर बेहद दुखद और अस्वीकार्य है।

सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में पलानीस्वामी ने कहा कि यह बेहद दुखद है कि राष्ट्रपति को इस घटना पर सार्वजनिक रूप से अपनी पीड़ा व्यक्त करनी पड़ी।

उन्होंने कहा, “यह बेहद दुखद है कि हमारी माननीय राष्ट्रपति को ऐसी घटना पर सार्वजनिक रूप से दुख जताना पड़ा।”

संवैधानिक संस्थाओं के सम्मान पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति जैसे पद केवल औपचारिक प्रतीक नहीं हैं, बल्कि वे भारतीय गणराज्य की गरिमा और भावना का प्रतिनिधित्व करते हैं।

उन्होंने बिना सीधे पश्चिम बंगाल सरकार का नाम लिए कहा कि शासन की जिम्मेदारी संभालने वालों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि प्रशासनिक व्यवहार देश की संवैधानिक संस्थाओं के प्रति सर्वोच्च सम्मान को दर्शाए।

वहीं एएमएमके के संस्थापक टी.टी.वी. दिनाकरन ने भी इस घटना की निंदा करते हुए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से माफी मांगने की मांग की।

दिनाकरन ने इस घटना को राष्ट्रपति के प्रति “सोची-समझी बेइज्जती” बताया और आरोप लगाया कि यह राजनीतिक रूप से प्रेरित कदम था।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर होता है और हर हाल में उसके प्रति पूरा सम्मान दिखाया जाना चाहिए।

दिनाकरन ने राष्ट्रपति के दौरे के दौरान स्थापित प्रोटोकॉल के गंभीर उल्लंघन का भी आरोप लगाया।

उनके अनुसार, राष्ट्रपति के आगमन पर मुख्यमंत्री या किसी वरिष्ठ मंत्री द्वारा स्वागत करने की परंपरा का पालन नहीं किया गया। साथ ही कार्यक्रम का स्थल भी अंतिम समय में बदल दिया गया, जिससे विवाद पैदा हुआ और आयोजकों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हुए।

तमिलनाडु के नेताओं की इन टिप्पणियों के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। विपक्षी नेताओं ने इस मामले में जवाबदेही तय करने और राष्ट्रपति से जुड़े आधिकारिक कार्यक्रमों में संवैधानिक प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की मांग की है।
 

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