प्रो. गीता भट्ट का बड़ा बयान: 21वीं सदी में नारी शक्ति के लिए चाहिए स्पष्ट रोडमैप, तभी बनेगा नया भारत

21वीं सदी में महिलाओं के सशक्तीकरण के लिए स्पष्ट रोडमैप जरूरी: प्रो. गीता भट्ट


नई दिल्ली, 7 मार्च। दिल्ली में महिला बुद्धिजीवियों का राष्ट्रीय सम्मेलन 'भारती-नारी से नारायणी' आयोजन चल रहा है। यह दो दिवसीय आयोजन 7 से 8 मार्च को विज्ञान भवन में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें महिलाओं की राष्ट्र निर्माण में भूमिका, सशक्तीकरण और नेतृत्व पर गहन चर्चा की जाएगी।

कार्यक्रम के बाद प्रोफेसर गीता भट्ट ने आईएएनएस के साथ खास बातचीत की। उन्होंने कहा, "भारत विद्वत परिषद और अन्य संस्थाओं को इस पहल का स्वागत करना चाहिए। साथ ही देशभर की वे महिलाएं, जो किसी भी क्षेत्र में फैसले लेने की जिम्मेदारी निभा रही हैं, उन्हें भी इसका समर्थन करना चाहिए। भारत में महिलाएं देश की आधी आबादी हैं, इसलिए 21वीं शताब्दी में उन्हें सशक्त बनाने के लिए स्पष्ट रोडमैप की जरूरत है।"

उन्होंने इस आयोजन का स्वागत करते हुए कहा कि यह पहल देशभर की निर्णय लेने वाली महिलाओं को एक मंच पर लाकर नारी को शक्ति के रूप में देखने का प्रयास है।

गीता भट्ट ने कहा, "शक्ति का मतलब है सामर्थ्य, ऊर्जा और कार्य करने की क्षमता। आज टेक्नोलॉजी और सामाजिक चुनौतियों के दौर में महिलाओं को इनसे निपटने की ताकत दी जानी चाहिए। भारतीय संस्कृति में नारी का स्थान हमेशा ऊंचा रहा है और निर्णय प्रक्रिया में उनकी भागीदारी महत्वपूर्ण रही है। अब समय है कि 21वीं सदी में वे और अधिक सशक्त होकर आगे बढ़ें। इस दो दिवसीय सम्मेलन से कई सकारात्मक विचार और समाधान निकलकर आएंगे, जो महिलाओं के सशक्तीकरण और राष्ट्र निर्माण में मदद करेंगे।"

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को आंतरिक शक्ति, ऊर्जा और सामर्थ्य वाली सशक्त रूप में देखना है और उन्हें निर्णय लेने वाली भूमिका में आगे लाना है। यह कार्यक्रम महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम भी हो सकता है।
 

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