ईडी की कार्रवाई में सीएम ममता बनर्जी का हस्तक्षेप ठीक नहीं: नीरज कुमार

ईडी की कार्रवाई में सीएम ममता बनर्जी का हस्तक्षेप ठीक नहीं: नीरज कुमार


पटना, 12 जनवरी। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रवक्ता नीरज कुमार ने आई-पैक के दफ्तर में ईडी की छापेमारी पर सीएम ममता बनर्जी के हस्तक्षेप को लेकर आपत्ति जताई।

उन्होंने सोमवार को समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जिस तरह से ईडी की छापेमारी के दौरान दखलअंदाजी की, उससे यह साफ जाहिर होता है कि उनकी पार्टी की संबद्धता आई-पैक से है। ईडी एक स्वतंत्र जांच एजेंसी है। उसे हर प्रकरण की स्वतंत्र रूप से जांच करने की पूरी आजादी है। इसमें किसी को भी कोई शक नहीं होना चाहिए।

जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के प्रवक्ता ने कहा कि ईडी का आरोप है कि आई-पैक कंपनी में कोयला स्कैम का पैसा लगा हुआ है। इसी को देखते हुए ईडी ने यह छापेमारी की है, लेकिन जिस तरह से ईडी की कार्रवाई के दौरान सीएम ममता बनर्जी की ओर से हस्तक्षेप किया गया, वो पूरी तरह से गलत है, उसे किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

नीरज कुमार ने कहा कि अब ईडी ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। इसके इतर, सीएम ममता बनर्जी की ओर से भी प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। ऐसी स्थिति में यह पूरा मामला कोर्ट में विचाराधीन है। ऐसी स्थिति में जो फैसला कोर्ट की ओर से लिया जाएगा, उसे ही ठोस और स्थायी माना जाएगा। उसमें किसी को किसी भी प्रकार का शक नहीं होना चाहिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि हर राजनीतिक दल का एकमात्र ध्येय यही रहता है कि वह हर राज्य में अपने लिए राजनीतिक परिधि को विस्तारित करे। इस दिशा में एनडीए लगा हुआ है और इसी को देखते हुए अगर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने केरल के आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कोई लक्ष्य निर्धारित किया है तो हमें उसका स्वागत करना चाहिए। हमें पूरा विश्वास है कि आगामी दिनों में इस लक्ष्य को धरातल पर उतारा जाएगा। चूंकि यह लक्ष्य पूरी तरह से जनता के हितों पर केंद्रित है, जिसे स्वीकार करने में किसी को कोई गुरेज नहीं होना चाहिए।

साथ ही, उन्होंने राज ठाकरे के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि राज ठाकरे को यह समझना होगा कि हिंदी एक राज्य भाषा है, जिसे हर समाज के लोग स्वीकार करते हैं। हालांकि, इस देश में कई बार ऐसी स्थिति देखने को मिली है, जब हिंदी या अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के बीच टकराव की स्थिति पैदा हुई, लेकिन इसके नतीजे भी देश के लोगों ने भलीभांति देखे। इसका परिणाम क्या हुआ, हम सभी को पता है। इसके अलावा, मैं राज ठाकरे को यह बात स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि बिहार, झारखंड और उत्तर प्रदेश के लोग किसी पर बोझ नहीं हैं, बल्कि हम लोग बोझ उठाने वाले लोग हैं। ऐसी स्थिति में मेरा राज ठाकरे को यही सुझाव रहेगा कि वो भाषा को नहीं, बल्कि जनसरोकारों से जुड़े मुद्दों को राजनीति की सूची में शामिल करें। अगर वो ऐसा करेंगे तो निश्चित तौर पर उन्हें आगामी दिनों में राजनीतिक मोर्चे पर फायदा पहुंचेगा।

उन्होंने देवकीनंदन ठाकुर के बयान पर कहा कि उनके लिए बेहतर रहेगा कि वे लोगों के बीच में धर्म का संदेश दें, न कि धर्म के नाम पर लोगों को दिग्भ्रमित करने की कोशिश करें, क्योंकि इससे उन्हें कुछ भी अर्जित होने वाला नहीं है। अब देवकीनंदन ठाकुर कथावाचक हैं, तो ऐसी स्थिति में इस बात की प्रबल संभावना है कि वे कथा करते रहेंगे, लेकिन संविधान की कथा स्पष्ट रूप से कहती है कि सभी लोगों का सम्मान किया जाना चाहिए। इसके साथ किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता है।
 

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