नई दिल्ली, 7 मार्च। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (डब्लूआर-II) ने 16 साल पुराने इंडस्ट्रियल गोदाम में चोरी के मामलों में घोषित अपराधी को सात साल बाद गिरफ्तार किया है। आरोपी को रोहिणी कोर्ट ने 2019 में फरार घोषित किया था।
क्राइम ब्रांच डीएसपी हर्ष इंदोरा ने बताया कि क्राइम ब्रांच की डब्लूआर-II यूनिट ने 2011 में दर्ज इंडस्ट्रियल गोदामों में चोरी के तीन मामलों में शामिल घोषित अपराधी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान संतोष मंडल उर्फ सदानंद (36) मंडल निवासी जिला बांका, बिहार के रूप में हुई है।
डीसीपी के अनुसार, 6 मार्च को घोषित अपराधी संतोष मंडल के मूवमेंट के बारे में गुप्त सूचना मिली। पुलिस को आरोपी को लांसर कॉन्वेंट स्कूल, रोहिणी, दिल्ली के पास आने की उम्मीद थी। इस जानकारी पर आरोपी को पकड़ने के लिए इंस्पेक्टर सतीश मलिक के नेतृत्व में एक डेडिकेटेड टीम बनाई। टीम के सदस्य सब इंस्पेक्टर अनुज छिकारा और हेडकांस्टेबल रविंदर ने टेक्निकल सर्विलांस किया, जिससे रोहिणी इलाके में आरोपी की लोकेशन का पता लगाने में मदद मिली। टेक्निकल इनपुट और फील्ड इंटेलिजेंस के आधार पर घेर कर भगोड़ा घोषित संतोष मंडल को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी को समयपुर बादली में रजिस्टर्ड तीन मामलों में भगोड़ा घोषित किया गया था। 29 नवंबर 2019 को रोहिणी कोर्ट जज नेहा गुप्ता सिंह के आदेश पर फरार घोषित किया गया था। इसके बाद से ही आरोपी गिरफ्तारी से बच रहा था।
पूछताछ के दौरान, आरोपी ने बताया कि वह दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में इंडस्ट्रियल गोदामों में लूट और चोरी करने वाले एक गैंग का सदस्य था। वह अनपढ़ है और बिहार में अपने गांव में पैदा हुआ और वहीं पला-बढ़ा है। 2011 में वह नौकरी की तलाश में दिल्ली आया और शुरू में मजदूर के तौर पर काम किया। लेकिन, अपनी कमाई से खुश न होने पर वह अपराधी प्रवृत्ति के लोगों के संपर्क में आया और इंडस्ट्रियल गोदामों में लूट और चोरी करने लगा।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि आरोपी संतोष को पहले कई मामलों में गिरफ्तार किया गया था, जहां से राशि भी बरामद हुई थी। बेल पर रिहा होने के बाद और गिरफ्तारी से बचने के लिए दिल्ली से भाग गया और बिहार में रहने लगा था। इसके बाद 2019 में कोर्ट ने उसे प्रोक्लेम्ड ऑफेंडर घोषित कर दिया था।