आरएसएस की शांता कुमारी का आह्वान: नारी सनातन धर्म की मूल शक्ति, राष्ट्र निर्माण में बनें सामाजिक सूत्रधार

'नारी सनातन और हिंदू धर्म का अहम हिस्सा', आरएसएस की प्रमुख संचालिका शांता कुमारी ने समाजिक भागीदारी देने को किया प्रेरित


नई दिल्ली, 7 मार्च। 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर राजधानी दिल्ली में दो दिवसीय कार्यक्रम "नारी से नारायण" का आगाज हो चुका है, और कार्यक्रम में दिल्ली की सीएम गुप्ता भी पहुंचीं और अपने शुरुआती जीवन के बारे में बात की।

इस मौके पर राष्ट्र सेविका समिति (आएसएस की महिला शाखा) की वर्तमान प्रमुख संचालिका वी. शांता कुमारी भी मौजूद रहीं, जिन्होंने महिलाओं के उत्थान पर बात की।

प्रमुख संचालिका वी. शांता कुमारी ने नारी शक्ति को सनातन और हिंदू धर्म का अहम हिस्सा माना और श्लोक के जरिए नारी शक्ति की बखान किया। उन्होंने कहा, "राष्ट्रस्य सुदृढा शक्ति: समाजस्य च धारिणीभारते संस्कृते नारी, माता नारायणी सदा।" यानी नारी भारत की शक्ति का स्त्रोत है, जो राष्ट्र को सुदृढ करती है, तथा समाज को धारण करती है और देवी माँ की भांती सदा सर्वदा पालन पोषण एवं संस्कार करती है। हमारे भारत में महिलाएं हर क्षेत्र में आगे निकल रही हैं, लेकिन मनुस्मृति जैसे ग्रंथों का सहारा लेकर महिला को निशाना बनाने का काम किया जाता है।

उन्होंने संबोधन में वराह पुराण का जिक्र किया और बताया कि इस पुराण का उदाहरण कोई नहीं देता, जिसमें महिलाओं को शक्ति का प्रतीक माना जाता है और उन्हें खरा सोना कहा गया है। नारी सोने की तरह शुद्ध है। स्वामी विवेकानंद ने भी महिलाओं को मातृशक्ति और सिर्फ प्यार देने वाली कहा है। उन्होंने अपने विचारों में महिलाओं को दूसरे के लिए जीने वाले मनुष्य की तरह प्रस्तुत किया है, जो सिर्फ दूसरे के लिए जीती है।

शांता कुमारी ने सभी महिलाओं से अपने भीतर छिपी आंतरिक शक्ति को पहचानने के लिए कहा। उनका कहना है कि महिला शक्ति से भरी है, सिर्फ उस शक्ति को पहचानना जरूरी है। वह किसी से कम नहीं, बल्कि हमेशा पुरुषों से आगे रही है। इस शक्ति का इस्तेमाल समाज का उद्धार करने से लेकर अपनी निजी परेशानियों का हल करके भी कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि मंथन के जरिए कई अलग-अलग मुद्दों पर बात होगी लेकिन हमें भारत की जड़ों को समझना होगा और हर वर्ग की महिलाओं की समस्या को समझते हुए आगे बढ़ना होगा। महिलाओं को सिर्फ घर तक सीमित नहीं रहना है, बल्कि समाज को भी सकारात्मक वातावरण देना है।
 

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