गिरिराज सिंह बोले: नीतीश कुमार के बेटे निशांत के लिए राजनीति में एंट्री का सही समय, वोट बैंक की मांग

राजनीति में एंट्री करने के लिए यह निशांत कुमार के लिए सही समय: गिरिराज सिंह


पटना, 7 मार्च। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार जल्द ही जदयू का दामन थाम सकते हैं और अपनी राजनीतिक पारी का आगाज कर सकते हैं। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि निशांत कुमार की राजनीति में एंट्री के लिए यह सही समय है।

पटना में मीडिया से बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि नीतीश कुमार बिहार के ऐसे नेता रहे हैं जिन्होंने लगभग दो दशकों तक असरदार लीडरशिप के साथ राज्य के विकास को आगे बढ़ाने के लिए काम किया। आज भी नीतीश कुमार खुद फैसले लेते हैं और सही समय पर लेते हैं। निशांत कुमार के लिए जदयू के वोट बैंक की मांग है कि निशांत कुमार को राजनीति में आना चाहिए। मेरा मानना है कि यह समय है कि उन्हें राजनीति में आना चाहिए।

टीएमसी सरकार पर निशाना साधते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस सरकार घबराई हुई है और जनता में उसके खिलाफ गुस्सा है। सरकार ने 26,000 टीचरों की नियुक्तियां रद्द कर दीं। इससे लाखों युवा परेशान हैं। टीएमसी सरकार ने कर्मचारियों को सातवां वेतन आयोग का लाभ नहीं दिया। भाजपा की सरकार आएगी तो शिक्षकों की बहाली भी होगी और कर्मचारियों को सातवां पे कमीशन दिया जाएगा। बंगाल की महिलाओं को 3 हजार रुपए सहायता राशि दी जाएगी। लखपति दीदी बनाया जाएगा। इसीलिए टीएमसी की सरकार घबराई हुई है। जनता वोट के जरिए टीएमसी का सूपड़ा साफ कर देगी।

उन्होंने कहा कि भाजपा की सरकार बनने के बाद बांग्लादेशी घुसपैठियों को निकाला जाएगा। गुंडों का हिसाब किया जाएगा।

जीएसटी सुधारों का जिक्र करते हुए गिरिराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में किए गए जीएसटी सुधारों ने भारत के ऑटोमोबाइल क्षेत्र को नई गति दी है। बेहतर कर व्यवस्था और बढ़ते आर्थिक विश्वास के कारण ऑटो बाजार में रिकॉर्ड मांग देखने को मिल रही है, जिससे बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह प्रगति न केवल उद्योग को मजबूती दे रही है, बल्कि रोजगार, निवेश और आर्थिक विकास को भी नई ऊर्जा प्रदान कर रही है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में जन औषधि केंद्रों का विस्तार ग्रामीण और शहरी भारत के बीच की दूरी को कम कर रहा है। आकांक्षी जिलों, पहाड़ी क्षेत्रों, द्वीपों और पूर्वोत्तर तक सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाओं की पहुंच सुनिश्चित करते हुए यह पहल आम नागरिकों के स्वास्थ्य खर्च को कम कर रही है।

साथ ही ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देकर स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित कर रही है। जन औषधि केंद्र केवल सस्ती दवाओं का माध्यम नहीं, बल्कि समावेशी विकास, बेहतर स्वास्थ्य सुरक्षा और आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक सशक्त कदम हैं।
 

Similar threads

Latest Replies

Trending Content

Forum statistics

Threads
13,791
Messages
13,828
Members
20
Latest member
7519202689
Back
Top