दिल्ली: सीएम रेखा गुप्ता ने बताए अपने जीवन के संघर्ष, महिलाओं को सशक्त बनने का दिया संदेश

दिल्ली: सीएम रेखा गुप्ता ने बताए अपने जीवन के संघर्ष, महिलाओं को सशक्त बनने का दिया संदेश


नई दिल्ली, 7 मार्च। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता शनिवार को महिला बुद्धिजीवियों के राष्ट्रीय सम्मेलन 'भारती नारी से नारायणी' में हिस्सा लेने के लिए विज्ञान भवन पहुंचीं। इस मौके पर उन्होंने महिलाओं को संबोधित करते हुए उनके योगदान, साहस और बलिदान को नमन किया।

उन्होंने अपने जीवन की कठिनाइयों और संघर्षों का भी जिक्र किया कि कैसे एक छोटे और साधारण परिवार की बेटी ने मेहनत और हिम्मत के दम पर दिल्ली की मुख्यमंत्री की कुर्सी तक का सफर तय किया।

सीएम रेखा गुप्ता ने कहा, "आज मैं देश की राजधानी दिल्ली की मुख्यमंत्री के रूप में उपस्थित हूं, लेकिन मेरी भी बड़ी लंबी यात्रा है। एक साधारण से परिवार की बेटी, जिसके परिवार में चार बहनें हो और वैश्य समाज से जुड़ी हो, वो बेटी किस तरीके से यहां तक पहुंच पाई होगी, आप खुद समझ सकते हैं।"

उन्होंने कहा, "मैं आज भी याद करती हूं वह दिन कि जब मैं कॉलेज में एडमिशन लेने के लिए निकली तो मेरे पिताजी ने कहा कि यह लो पैसे, लेकिन गर्ल्स कॉलेज में एडमिशन लेना। जब एडमिशन लेने के लिए मैं अपनी सहेलियों के साथ यूनिवर्सिटी पहुंच गई, तो मैंने देखा एक मिरांडा कॉलेज है और एक दौलतराम कॉलेज। हमने दौलतराम में एडमिशन ले लिया।"

उन्होंने बताया कि कॉलेज में रहते हुए उन्हें महसूस हुआ कि स्टूडेंट्स की समस्याओं के लिए काम करना जरूरी है। इस दिशा में उन्होंने विद्यार्थी परिषद से जुड़कर धीरे-धीरे कॉलेज के चुनावों में हिस्सा लेना शुरू किया और बाद में विश्वविद्यालय के चुनावों तक पहुंची। दिल्ली विश्वविद्यालय की प्रतिनिधि बनकर वे समाज में सक्रिय हुईं।

उन्होंने यह भी बताया कि पारंपरिक सोच वाले परिवार में उनकी मां कहती थीं कि ऐसी चीजें लड़कियों के लिए नहीं हैं। उस समय समाज का मानना था कि एक लड़की का जीवन केवल शादी करने और अच्छे परिवार में सेट होने तक ही सीमित है, लेकिन उन्होंने इस सोच को चुनौती दी और समाज में अपनी पहचान बनाई।

सीएम रेखा गुप्ता का कहना है कि देश में "बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ" जैसी योजनाएं भी इस सोच को बदलने और बेटियों को आगे बढ़ाने का काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि बेटियों को पढ़ाना, उन्हें सशक्त बनाना और समाज में उनके योगदान को मान्यता देना हर परिवार और समाज की जिम्मेदारी है।

उन्होंने महिलाओं से कहा कि वे अपने अधिकारों के प्रति जागरूक रहें। समाज में बदलाव लाएं और खुद की पहचान बनाएं। उनके अनुसार मेहनत, साहस और लगन से कोई भी लड़की अपने जीवन में बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकती है।
 

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