पटना, 6 मार्च। पटना में नीट छात्रा की संदिग्ध हालात में मौत के मामले में एक नया मोड़ आया है। बिहार सरकार ने अपनी पहले की अधिसूचना में संशोधन करते हुए बाल यौन उत्पीड़न संरक्षण अधिनियम (पोक्सो) की धाराओं को जोड़ा है।
पटना पुलिस ने एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 64 और अन्य संबंधित धाराएं भी जोड़ दी हैं। इस संशोधन के बाद अब सीबीआई इन धाराओं के तहत कानूनी रूप से मामले की जांच कर सकेगी और जांच के सभी पहलुओं की निगरानी करेगी।
दरअसल 6 जनवरी को छात्रा अपने हॉस्टल के कमरे में बेहोश मिली थी। हॉस्टल प्रशासन और अन्य छात्राओं ने उसे तुरंत अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसकी हालत गंभीर बताई। पांच दिन तक इलाज चलने के बाद 11 जनवरी को छात्रा की मौत हो गई।
शुरुआती पुलिस जांच आत्महत्या की आशंका पर केंद्रित थी, लेकिन पीड़ित परिवार ने शुरू से ही दुष्कर्म और हत्या का आरोप लगाया था। उनका कहना था कि मामले को आत्महत्या दिखाने की कोशिश की जा रही है।
9 जनवरी को चित्रगुप्त नगर थाने में जब एफआईआर दर्ज की गई थी, तब उसमें पॉक्सो एक्ट की धाराएं शामिल नहीं की गई थीं। शुरुआत में जांच एजेंसियां इस घटना को संदिग्ध आत्महत्या का मामला मानकर जांच कर रही थीं। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, वैसे शुरुआती आकलन पर गंभीर सवाल उठने लगे।
मामला कोर्ट पहुंचा तो अदालत ने पूछा कि जब पीड़िता नाबालिग थी और यौन उत्पीड़न की आशंका थी, तो पॉक्सो एक्ट की धाराएं क्यों नहीं लगाई गईं। कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद बिहार सरकार ने मामले की समीक्षा की और संशोधित अधिसूचना जारी करते हुए पॉक्सो एक्ट की धाराएं जोड़ दीं।
यह घटना पटना के चित्रगुप्त नगर इलाके में स्थित शंभू गर्ल्स हॉस्टल में हुई थी, जहां कई छात्राएं राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान रहती हैं।