संजय राउत का अमेरिका पर पलटवार: रूस से तेल खरीद भारत का फैसला, किसी की मंजूरी नहीं चाहिए

रूस से तेल खरीदने पर फैसला भारत सरकार को करना चाहिए, न कि अमेरिका की मंजूरी पर : संजय राउत


मुंबई, 6 मार्च। शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने अमेरिका द्वारा रूस से तेल खरीद को लेकर भारत को एक महीने की मोहलत दिए जाने पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस पूरे मुद्दे को भारत की विदेश नीति और राजनीतिक स्वतंत्रता से जोड़ते हुए तीखी आलोचना की।

मीडिया से बातचीत करते हुए राउत ने कहा कि अगर किसी दूसरे देश को यह अधिकार मिल जाए कि वह तय करे कि भारत कब और कितना तेल खरीदे, तो यह स्थिति ठीक नहीं मानी जा सकती।

राउत ने कहा कि यह बात समझ से परे है कि कोई दूसरा देश भारत को इस तरह 'परमिशन' दे। उनके मुताबिक, इस तरह की अनुमति आम तौर पर एक ताकतवर देश अपने अधीन या कमजोर देश को देता है। उन्होंने कहा कि अगर कहा जा रहा है कि भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए एक महीने की छूट दी गई है, तो इसका मतलब यह हुआ कि हमारी विदेश नीति कहीं न कहीं दूसरे देश के इशारों पर चल रही है। उन्होंने इसे भारत की राजनीतिक स्वायत्तता के लिए सही संकेत नहीं बताया।

उन्होंने आगे कहा कि रूस से तेल खरीदने के लिए अमेरिका की परमिशन देना यह दर्शाता है कि भारत अमेरिका के अधीन और गुलाम है। अब अमेरिका जो कहेगा भारत वही करेगा। विदेश नीति में हमारी कोई आवाज नहीं है, कोई भूमिका नहीं है।

राउत का कहना है कि अगर हमें ऊर्जा की जरूरत है और रूस से तेल खरीदना हमारे लिए फायदेमंद है, तो इस पर फैसला भारत सरकार को खुद करना चाहिए, न कि किसी दूसरे देश की मंजूरी के आधार पर।

संजय राउत ने कहा कि भारत की राजनीतिक नेतृत्व और सरकार को इस मामले में साफ और मजबूत रुख अपनाना चाहिए। उनका कहना है कि देश की विदेश नीति पूरी तरह से स्वतंत्र होनी चाहिए और किसी भी बाहरी दबाव से प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को अपने हितों के आधार पर ही अंतरराष्ट्रीय फैसले लेने चाहिए।
 

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