मतदाता सूची में गड़बड़ी पर ECI सख्त: झारखंड-ओडिशा से 200 अधिकारी बंगाल में न्यायिक जांच से जुड़ीं

झारखंड व ओडिशा के 200 अधिकारी बंगाल में चल रही न्यायिक प्रक्रिया में होंगे शामिल


कोलकाता, 6 मार्च। झारखंड और ओडिशा के 200 न्यायिक अधिकारी शनिवार तक पश्चिम बंगाल पहुंच जाएंगे। यह अधिकारी 9 मार्च से भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा "तार्किक विसंगति" श्रेणी के तहत पहचाने गए मतदाताओं के दस्तावेजों के न्यायिक निर्णय की चल रही प्रक्रिया में शामिल होंगे।

पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) के कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि वे शनिवार व रविवार को न्यायिक निर्णय प्रक्रिया पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में रहेंगे। इसके बाद सोमवार से वे राज्य के मौजूदा न्यायिक अधिकारियों की टीम में शामिल हो जाएंगे जो पहले से ही चल रही न्यायिक निर्णय प्रक्रिया में लगे हुए हैं।

मुख्य कार्यकारी अधिकारी के कार्यालय के एक सूत्र ने बताया, "झारखंड और ओडिशा से 200 न्यायिक अधिकारियों के शामिल होने से न्याय प्रक्रिया में शामिल न्यायिक अधिकारियों की कुल संख्या बढ़कर 732 हो जाएगी।

झारखंड व ओडिशा से आने वाले इन 200 न्यायिक अधिकारियों में से अधिकांश को कोलकाता में तैनात किया जाएगा, जबकि कुछ को पूर्वी मिदनापुर जिले के बर्धमान, पश्चिमी बर्दमान जिले के आसनसोल, पश्चिमी मिदनापुर जिले के खड़गपुर और दार्जिलिंग जिले के सिलीगुड़ी जैसे अन्य प्रमुख शहरों में भी तैनात किया जाएगा।"

उनके रहने की व्यवस्था मुख्य रूप से कोलकाता हवाई अड्डे और कोलकाता के साथ ही संबंधित जिले के शहरों में स्थित महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों के नजदीक की गई है।

विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में न्यायिक निर्णय से संबंधित दो अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम और राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए तैयारियों से संबंधित घटनाक्रम अगले सप्ताह, विशेष रूप से सोमवार और मंगलवार को होने वाले हैं।

मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार की अध्यक्षता में चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ 8 मार्च की रात को कोलकाता पहुंचेगी और अगले दो दिनों के व्यस्त कार्यक्रम के साथ चल रही न्यायिक प्रक्रिया के साथ-साथ आगामी विधानसभा चुनावों की तैयारियों की समीक्षा करेगी।

10 मार्च को सुप्रीम कोर्ट में एसआईआर और संबंधित न्यायिक निर्णय पर एक महत्वपूर्ण सुनवाई निर्धारित है।

पश्चिम बंगाल में न्यायिक निर्णय के लिए भेजे गए मामलों को छोड़कर अंतिम मतदाता सूची 28 फरवरी को प्रकाशित की गई थी। सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व आदेश के अनुसार पूरक सूची उचित समय पर प्रकाशित की जाएगी।

सीईओ कार्यालय से उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार न्यायिक निर्णय के लिए 60 लाख से अधिक मामले भेजे गए थे और गुरुवार रात तक लगभग पांच लाख मामलों की प्रक्रिया पूरी हो चुकी थी।
 

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